भाजपा के ख़िलाफ़ हुए पाटीदार-‘धारा 144 लगी है वोट की भीख मांगने यहाँ न आएं’

November 9, 2017 by No Comments

गांधीनगर: गुजरात विधानसभा चुनाव इस बार बहुत ही दिलचस्प होने वाले हैं। जब राज्य में 22 सालों से सत्ता संभाले बैठी बीजेपी चुनाव जीतने के साथ अपनी नाक बचाने की कोशिशों में हैं। इस बार कांग्रेस बहुत ही दमदार तरीके से बीजेपी पर हावी हो रही है। जहाँ राज्य की जनता को लुभाने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष चुनाव प्रचार में बढ़-चढ़ कर भाग ले रहे हैं। वहीँ कांग्रेस उपाध्यक्ष भी लगातार गुजरात के दौरे कर बीजेपी को घेर रहे हैं।

बीजेपी को हराने के लिए कांग्रेस की रणनीति इस बार काबिल-ए-तारीफ़ हैं। राज्य के तीन युवा नेताओं को साथ लाने के लिए राहुल गाँधी हर संभव कोशिश कर रहे हैं। राज्य में 16% पाटीदार, 59% ओबीसी और 7% दलित गुजरात में निर्णायक साबित हो रहे हैं। जिसमें से पाटीदार समुदाय को हार्दिक पटेल, ओबीसी समुदाय को अल्पेश ठाकोर और दलित समुदाय को जिग्नेश मेवानी ने संगठित किया हुआ है।

इन तीनों की तिकड़ी को साथ लाना यूं तो कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती है। लेकिन अल्पेश ठाकोर ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है और हार्दिक पटेल जल्द ही इस पर फैसला ले सकते हैं। इस कड़ी में बीजेपी के लिए एक और बुरी खबर है। दरअसल पाटीदारों में बीजेपी का विरोध मुखर होकर सामने आ रहा है। पाटीदारों ने बीजेपी कार्यकर्ताओं का उनके इलाके में आकर चुनाव प्रचार करना काफी मुश्किल कर दिया है।पाटीदार इलाकों में बीजेपी कार्यकर्ताओं के लिए ‘धारा 144’ लगा दी गई है। इसके साथ कई पाटीदार इलाकों में इस तरह के बैनर लगाए गए हैं कि ‘बीजेपी वाले यहां वोट मांगने न आएं। जब भी बीजेपी के कार्यकर्ता इन इलाकों में पार्टी के लिए चुनाव प्रचार करने आते हैं तो इस समुदाय के लोग इनका विरोध कर इनपर अंडे और अन्य चीज़ें फेंकते हैं और इन्हे यहाँ से भगा रहे हैं। कुछ जगहों पर मामला पुलिस तक पहुंच गया है।

दरअसल राज्य में हुए पाटीदार आरक्षण आंदोलन के वक्त गुजरात की बीजेपी सरकार ने कई पाटीदार इलाकों में धारा 144 लगा दी थी। इस दौरान किसी भी पाटीदार के बाहर दिखाई देने पर उन्हें बुरी तरह से पीटा गया।इसी का जवाब अब पाटीदार लोग बीजेपी को उसी तरह से दे रहे हैं। जब भी कोई बीजेपी नेता पाटीदारों की चौखट पर वोट मांगने के लिए जा रहा है तो उन्होंने धारा 144 लगा दिया है और कहा है कि वे ‘वोट की भीख मांगने उनकी सोसायटी में ना आएं।

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