सबरीमला में दर्शन से पहले मस्जिद जाते हैं तीर्थयात्री क्यूँकि…

October 18, 2018 by No Comments

केरल का सुप्रसिद्ध सबरीमला मंदिर कई तरह से अपने आप मे अनूठा है। इस के इतिहास की बात करें तो इसका निर्माण 12वीं सदी में पंडालम राजवंश के युवराज मणिकंदन ने कराया था। एक लंबे समय तक यहाँ एक विशेष आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी थी। इक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दे दी है।

आपको बता दें कि सबरीमाला मंदिर मे भगवान अयप्पा का निवास है।हर साल लाखो श्रद्धालु यहाँ भगवान अयप्पा के दर्शन करने आते हैं। यह एक लंबी यात्रा होती है जो 41 दिन तक चलती है। इस मे भक्त व्रत रखते है ।बह्रचार्य का पालन करते हैं ।इस के अलावा सभी नियमों का ध्यान भी रखते हैं।

सबरीमला यात्रा के रास्ते मे भगवान अयप्पा के मंदिर से करीब 60 किलोमीटर पहले एक छोटा सा कस्बा पड़़ता है जिसका नाम है इरुमलै। यहाँ एक मस्जिद है जिसका नाम है वावर मस्जिद। तीर्थ यात्रा के नियम अनुसार सभी श्रद्धालुऔं का यहाँ रुकना अनिवार्य है। दिलचस्प बात यह है कि, तीर्थ यात्रा के दौरान पहले इस मस्जिद मे जाना होता है ,बाद मे पास के दो मंदिरों में ।

भक्त इस मस्जिद की परिक्रमा करते हैं वावर स्वामी की जय जयकार करते हैं ,यहाँ से काली मिर्च एंव विभूति लेकर आगे बढ़ते हैं। इस दौरान मस्जिद मे नमाज़ बंद नहीं होती है ,बल्कि पहले की तरह जारी रहती है। उल्लेखनीय है कि मस्जिद की परिक्रमा और पूजा पाठ करने की परंपरा पिछले 500 साल से भी अधिक समय से चल रही है ।इस इलाके मुस्लिम आबादी ज़्यादा है लेकिन वह भी सबरीमला मंदिर से अपने रिश्ते का उत्सव मनाते है, इस उत्सव को चंदनकुकुड़म यानी चंदन-कुमकुम कहा जाता है.

कहा जाता है कि वावर एक सूफ़ी संत थे जो भगवान अयप्पा में आस्था रखते थे।उनकी अयप्पा भक्ति के कारण ही इस मस्जिद को सबरीमला यात्रा मे एक पड़ाव के तौर पे शामिल कर लिया गया था,जो आज तक जारी है ।

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