जो कहते हैं इस्लाम तल-वार से फैला वो ज़रूर पढ़ें हुज़ूर ए पाक की रहमदिली की ये दास्तान

इस्लाम के दुश्मन अक्सर यह कहते हुए सुने जाते हैं कि इस्लाम तलवार के ज़ौर से फैला है। यक़ीनी तौर पर इन लोगों ने हुज़ूरे अकरम स०अ० की सीरत का मुताला( study ) नहीं किया है। वरना तारीख़ गवाह है कि फत्हे मक्का के बाद ,अपने दुश्मनों के साथ जिस तरह का सुलूक मौहम्मद स०अ० ने किया है ,वैसा दुनिया के किसी भी बादशाह ने नहीं किया होगा। अबु सूफ़ियान, इस्लाम लाने से पहले मुसलमानों के कट्टर दुश्मन थे। वो बद्र ,अहद ,खंदक की जंगो मे दुश्मनों के सरगना थे।

कितने ही मुसलमान उनकी तलवार से शही-द हो जाते हैं। यहाँ तक के मौहम्मद स०अ० के कत्-ल का भी इरादा रखते थे। लेकिन फत्हे मक्का के बाद आप स०अ० ने सिर्फ उनको माफ कर दिया बल्कि यह ऐलान करवा दिया जो अबु सूफ़ियान के घर मे पनाह लेगा उसको हमारी और से अमान है। हज़रत हमज़ा रज़ि०अ० मौहम्मद स०अ० के चाचा थे जो आप को बहुत अज़ीज़ थे।”वहशी” ने उनको क़-त्ल किया था। हुज़ूर स०अ० के सामने पेश होता है। आप के सामने चचा की शहादत का मंज़र ताज़ा हो जाता है। आँखें आँसुओं से भर आयीं। लेकिन वहशी को सज़ा देने के बजाय सिर्फ इतना ही कहा -ऐ वहशी मेरे सामने न आया करो,शहीद चाचा की याद ताज़ा हो जाती है।

अबु सूफ़ियान की बीवी हिन्दा ने आपके चाचा हज़रत हमज़ा रज़ि० अ० के लाश के साथ दुरव्यवहार की मुजरिम हैं। उनका सीना चीर देती हैं।नाक कान काटकर गले का हार बनाती हैं। कलेजा चबाकर खाना चाहती हैं।लेकिन हुज़ूर अकरम मुहम्मद स०अ० सरापा रहमत थे। हिन्दा को भी माफ कर देते है। यहाँ तक कि यह भी नहीं पूछते कि तूने ऐसा क्यों किया। हेबार बिन असवद आपकी बेटी का क़ा-तिल है। और भी बहुत से फसादों मे शामिल रहा है।फत्हे मक्का के बाद आपके सामने पैश किया जाता है। अपने गुनाहों का इकरार कर लेता है। लेकिन यह आप स०अ० का दिल था कि अपनी बेटी के क़ा-तिल को भी माफ़ कर देते हैं।

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