सामने “भारत माता की जय” और पीछे माँ-बहन की गालियाँ, क्या यही है कन्हैया विरोधियों की असलियत?

November 11, 2017 by No Comments

कल लखनऊ लिटरेरी फ़ेस्टिवल में जमकर हंगामा हुआ. कन्हैया कुमार जो कि अपनी एक किताब के सिलसिले में यहाँ चर्चा करने आये थे उनके ख़िलाफ़ नारेबाज़ी होने लगी. शुरू में तो ऐसा लगा कि मामला गेट तक ही रहेगा और सिक्यूरिटी के लोग मामला संभाल लेंगे लेकिन बात वहीँ तक नहीं रही स्टेज तक आ गयी. मंच से गुज़ारिश भी की गयी कि अब उन्होंने अपना विरोध दर्ज करा लिया है और अब उन्हें जाना चाहिए लेकिन ऐसा लग रहा था मानो वो कन्हैया का विरोध करने नहीं इस कार्यक्रम का विरोध करने आये थे.

एक ऐसा कार्यक्रम जहां पूर्व राज्यपाल अज़ीज़ क़ुरैशी और वरिष्ट भाजपा नेता शत्रुघन सिन्हा जैसे दिग्गज भी मौजूद थे. दूर से देख कर तो यही लगता था कि विरोध करने वाले “भारत माता की जय”, “कन्हैया कुमार वापिस जाओ”,और “जय श्री राम” नारे लगा रहे हैं. हालाँकि ये सभी नारे और पूरा हंगामा सिर्फ़ अखबारों की फुटेज पाने के लिए ही था. ये बात इसलिए कही जा रही है क्यूंकि कैमरे के सामने आकर ज़ोर ज़ोर से “भारत माता की जय” बोलने वाले ये लोग ज़रा सा पीछे आ कर “माँ-बहन” की गालियाँ भी बक रहे थे.

हद तो ये हो गयी कि मंच पर एसिड अटैक सर्वाइवर्स लड़कियाँ अपील कर रहीं थीं और ये सुनने को तैयार नहीं थे. महिला-विरोधी मानसिकता इस क़दर हावी थी कि इस तरह की आवाज़ें भी आ रही थीं कि कन्हैया औरतों के पल्लू के पीछे छुप गया है. देर से ही सही लेकिन प्रशासन एक्टिव हुआ और बेमक़सद विरोध करने आये गुन्डों को भगा दिया गया. इसके बाद कार्यक्रम धीरे-धीरे अपने माहौल में आ गया और कन्हैया की किताब “बिहार से तिहाड़” पर चर्चा शुरू हुई.

हालाँकि लखनऊ की तहज़ीब के मुताबिक़ ये विरोध नहीं था लेकिन जिस तरह कन्हैया समर्थकों ने मंच को बचाया वो क़ाबिल ए तारीफ़ था. एक वक़्त जब मंच पर अफ़रा-तफ़री मचने लगी तो शाह मुहम्मद अफ़ज़ल ने लोगों को समझाने की कोशिश की. इसके बाद अमीक़ जामेई ने भी विरोध कर रहे लोगों को लखनऊ की तहज़ीब का वास्ता दिया. वहीँ दूसरी ओर पूजा शुक्ला एसिड अटैक सर्वाइवर्स के साथ मंच पर खड़ी रहीं और ये अपील करती रहीं कि कार्यक्रम होने दिया जाए. अंकित सिंह बाबू, अनिल यादव और सुधांशु बाजपाई ने भी पूरी कोशिश की कि मामला बिगड़ने ना पाए. ऐसा कहा जा सकता है कि लखनऊ की तहज़ीब को ख़राब करने की कोशिश करने वाले अगर 10 थे तो उस तहज़ीब पर अमल करने वाले उससे कहीं ज़्यादा थे.

बहरहाल, अब इस बारे में ऐसी ख़बर है कि कार्यक्रम की आगे की इजाज़त रद्द कर दी गयी है. अगर ऐसा होता है तो ये तहज़ीब के लिहाज़ से बहुत ग़लत होगा.

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