क़तर के इस फ़ैसले ने जीता दिल, भारतीय लोगों को भी होगा फ़ायदा..

October 29, 2018 by No Comments

क़तर एक ऐसा देश है जहां बड़ी संख्या में विदेश से लोग काम करने जाते हैं. बड़ी संख्या में ये मज़दूर तबक़ा है जो क़तर में रोज़ी-रोटी की तलाश में जाता है लेकिन इसमें एक परेशानी उन्हें रहती थी वो ये कि क़तर के क़ानून के मुताबिक़ कोई भी व्यक्ति अपने मालिक की मर्ज़ी के बिना देश नहीं छोड़ सकता लेकिन अब इसमें बदलाव किया गया है. नियमों में बदलाव के बाद अब क़तर में काम करने वाले विदेशी मज़दूरों को देश छोड़ने के लिए अपने मालिकों से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी. क़तर सरकार ने सितंबर माह में देश के आवासीय कानून में संशोधन किया था, जिसके बाद रविवार से इसे लागू किया गया है. पूर्व में इस कानून के तहत किसी भी प्रवासी श्रमिक को देश छोड़ने से पहले अपने मालिक की अनुमति लेनी होती थी.

कानून में हुए संशोधन के बाद अब प्रवासी बिना किसी की अनुमति के देश छोड़ सकते हैं.इस फ़ैसले से देश में काम कर रहे मज़दूरों को विशेष फ़ायदा होगा. यदि किसी को ऐसा करने में दिक्कत आती है तो वह प्रवासी निकास शिकायत समिति से जाकर इसकी शिकायत कर सकते हैं. मंत्रालय ने तीन दिनों के भीतर ही इस पर संज्ञान लेने की बात कही थी. काफ़ी समय से सामाजिक कार्यकर्ता और मानवाधिकार संगठन के लोग इस कानून को खत्म करने की मांग कर रहे थे. क़तर में लंबे समय से लागू इस कानून का नाम ‘कफाला स्पॉन्सरशिप सिस्टम’ के तहत प्रवासी कर्मचारियों पर निगरानी रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसमें विदेशी मज़दूर को अपने लिए किसी स्पॉन्सर की जरूरत होती है जो इनके वीजा और कानूनी प्रक्रिया का देखरेख करता है. ज़्यादातर मामालों ये स्पॉन्सर इनके मालिक ही होते हैं.

ये कानून मध्य पूर्व एशिया की ज्यादातर देशों में आज भी मौजूद हैं. इस तरह के क़ानून का विरोध लगातार इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाईजेशन करती रही है. अन्तराष्ट्रीय स्तर पर ऐसा होता रहा है लेकिन कहीं न कहीं क़तर पहले इस बात को नहीं मान रहा था, और अब मान गया है. इसकी एक वजह ये भी है कि 2022 में क़तर में वर्ल्ड कप होना है. फ़ुटबाल वर्ल्ड कप से पहले क़तर अपने देश में सामाजिक बदलाव लाने की कोशिश कर रहा है. माना जा रहा है कि इसका लाभ भारतीय मज़दूरों को भी मिलेगा जो बड़ी संख्या में क़तर में काम करते हैं.

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