सारी मुश्किलों को हरा कर आगे बढ़ रहा है क़तर

दोहा: क़तर डिप्लोमेटिक क्राइसिस अचानक ही इस साल 5 जून को शुरू हो गया. असल में सऊदी अरब, बहरीन, मिस्र और UAE ने एकदम से ही क़तर से अपने सभी रिश्ते ख़त्म कर लिए. इसको लेकर बातचीत रुकी, चली और ये दौर अभी भी चल ही रहा है. इस सब के बीच लेकिन क़तर को काफ़ी संघर्ष भी करना पड़ा है और उसकी वजह ये है कि क़तर खाने-पीने की चीज़ों के लिए 80% तक सऊदी अरब और UAE पर निर्भर था.

इस ब्लाकेड के बाद क़तर को कुछ देशों का समर्थन तो मिला जैसे ईरान और तुर्की लेकिन लम्बी अवधि के लिए क़तर को बड़े क़दम उठाने थे और इस मामले में देश ने बिलकुल देर नहीं की. क़तर की सरकार ने देश को ख़ुद पर निर्भर बनाने के लिए बड़े फ़ैसले लिए हैं. लोकल मीडिया की ख़बरों के मुताबिक़ भारत, ईरान और तुर्की जैसे देश क़तर में विनियोग करना चाहते हैं. सरकार भी चाहती है कि देश की फ़ूड इंडस्ट्री विकसित हो.

जानकारों के मुताबिक़ क़तर सिर्फ़ फ़ूड इंडस्ट्री ही नहीं दूसरी इंडस्ट्री में भी ख़ुद पर निर्भर होने की कोशिश में है. क़तर ने अपना शिपिंग रूट बदल दिया है और अब ये भारत के मुंद्रा पोर्ट से भी सामान मांगा रहा है. डेनमार्क की मेर्स्क भी क़तर में लगातार दिलचस्पी दिखा रही है.

क़तर डिप्लोमेटिक क्राइसिस को जहां शुरू में इस तरह देखा जा रहा था कि देश आर्थिक तौर पर टूट जाएगा. वहीँ अब ऐसा लग रहा है कि क़तर की सरकार इस कमज़ोरी से उबार आएगी और देश ख़ुद पर निर्भर होने की ओर काम करेगा.

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