कुरान में ये चार चीज़े ऐसी है जिसे जानकर मोमिन हासिल कर सकता है ये बेहतरीन चीज़े

March 30, 2019 by No Comments

अल्लाह ताला ने रात आराम के लिए और दिन काम के लिए बनाया।लिहाज़ा इशा के बाद लंबी महफ़िलें लगाना मायूब है।हदीस पाक में आता है कि नबी अलैहिस-सलाम की आदत मुबारका थी कि आप इशा की नमाज़ से पहले सोने को नापसंद फ़रमाते थे और इशा के बाद देर तक बातें करने को ना पसंद फ़रमाते थे।हाँ कोई दीन का प्रोग्राम हो तो उस के लिए तो सारी रात गुज़र जाये फिर भी थोड़ी है।
नबी अलैहिस-सलाम की मुबारक सुन्नत है कि इन्सान इशा के बाद जल्दी सो जाये।अगर हम इस सुन्नत से महरूम होंगे तो हमारे फ़र्ज़ के ऊपर उस का असर पड़ेगा और हम फ़ज्र की नमाज़ या उस की तकबीर औला से महरूम हो जाएंगे।आम घरों में अक्सर देखा गया कि इशा के बाद खाने की महफ़िल फिर गपों की महफ़िल फिर टीवी स्क्रीन के तमाशे तो आधी रात तो ऐसे ही गुज़ार देते हैं।फिर कहते हैं कि सुबह आँख नहीं खुलती।ये आँख कैसे खुले। जो रात को सोने के लिए जल्दी नहीं करेगा वो सुबह के वक़्त जल्दी नहीं उठ सकेगा।
वो बीबियाँ जो तहज्जुद में उठना चाहती हैं उनको भी चाहिए कि अपने काम रात से पहले पहले समेट लें और इशा के बाद जितना जल्दी मुम्किन हो सोने की आदत बनाएँ।बच्चों को भी जल्दी सोने की आदत डालें,ख़ुद भी जल्दी सोएँ।इसी तरह अल्लाह ताला ने अपने बंदों के लिए बीवी को भी सुकून के लिए बनाया है।कुरान पाक में आया है कि अल्लाह ताला का फरमान है, तुम में से तुम्हारे लिए जोड़ा इस लिए बनाया कि तुम सुकून हासिल करो।
औरत मर्द केलिए सुकून का बाइस है।गोया इन्सान के अंदर एक इज़तिराब था उस इज़तिराब को दूर करने के लिए इन्सानियत के दो टुकड़े यानी औरत मर्द की सूरत में कर दिए गए।और उनका आपस में मिलना सुकून का मूजिब क़रार दिया।।और दूसरी जगह फ़रमाया कि यानी औरतें तुम्हारे लिए लिबास हैं और तुम उनके लिए लिबास हो।
पस मूजिब सुकून और आराम होने में दोनों बराबर हैं ।मर्द औरत एक दूसरे की मुहब्बत के तलबगार हैं।और वो इस मुहब्बत के रिश्ता अज़्वाज में बंधे होते हैं।शादी से क़बल भी कई जोड़े मुहब्बत के नाम पर एक दूसरे से ताल्लुक़ात क़ायम करते हैं।लेकिन ऐसे जोड़ों की सब मुहब्बतें नाकाम साबित होती हैं।गोया रिश्ता अज़्वाज के सिवा ऐसे ताल्लुक़ात मुहब्बत ख़ुदा के नज़दीक काबिल-ए-क़बूल नहीं।
लेकिन शादी के बंधन में बंध जाने वाले जोड़ों ऐसे जोड़ों का आपस में मिलाप दिल की दो धड़कनें हैं जो दो वजूदों में एक साथ चलती हैं।गाड़ी के पहिये हैं जो एक साथ आगे बढ़ते हैं और लोगों को भी इस सवाल का जवाब अच्छी तरह पता है कि शादी से क़बल की मुहब्बत और रिश्ता अज़्वाज में बंध जाने के बाद मुहब्बत का क्या फ़र्क़ है।
और इसी तरह अल्लाह ताला ने घर में सुकून रखा है,अल्लाह ताला ने कुरान पाक में फरमाया है कि अल्लाह ने तुम्हारे लिए तुम्हारे घरों में सुकून रखा। आज कल लोग अपने घर के बाहर सुकून तलाश करते हैं,खाना घरों में ना खा कर होटल में खाते हैं और सुकून के लिए दूसरी जगह पर जाया करते हैं लेकिन असल सुकून घर में ही है,अगर इंसान ठीक तरह से अपने परिवार के साथ में रहे तो इस से ज़्यादा उसे और कहीं भी सुकून नहीं मिलेगी।

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