रघुराम राजन ने किया ‘मोदी सरकार’ पर कटाक्ष-‘मूर्ति समय पर पूरी हो सकती है तो बाक़ी काम क्यूँ नहीं?’

November 11, 2018 by No Comments

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने केंद्र की ‘मोदी सरकार’ पर कटाक्ष किया है. उन्होंने कहा कि जिस तरह से एक मूर्ति समय पर पूरी हो सकती है, उसी प्रकार बाक़ी परियोजनाएँ क्यूँ नहीं हो सकतीं. इस संबंध में उन्होंने गुजरात में हाल ही में अनावरण की गई सरदार पटेल की मूर्ति ‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’ परियोजना का ज़िक्र किया. उन्होंने कहा कि इस काम के लिए भी प्रधानमंत्री कार्यालय से मंज़ूरी लेनी पड़ी.बर्कले में शुक्रवार को कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में राजन ने कहा कि भारत में समस्या का एक हिस्सा यह है कि वहां राजनीतिक फैसले लेने की व्यवस्था हद से अधिक केंद्रीकृत है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल की 143वीं वर्षगांठ पर 31 अक्टूबर को गुजरात के नर्मदा जिले में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का अनावरण किया था. विश्व की सबसे ऊंची मूर्ति कही जा रही 182 मीटर की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को 2,989 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया. इसे महज 33 महीने में तैयार किया गया. राजन ने कहा, ‘भारत एक केंद्र से काम नहीं कर सकता है. भारत तब काम करता है जब कई लोग मिलकर बोझ उठा रहे हों. जबकि आज भारत में केंद्र सरकार के पास शक्तियां अत्यधिक केंद्रीकृत हैं.’

उन्होंने आगे कहा कि इसका उदाहरण है कि बहुत सारे निर्णय के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय की सहमति लेनी होती है. जब तक प्रधानमंत्री कार्यालय से अनुमति नहीं मिल जाती है, कोई निर्णय नहीं लेना चाहता. राजन ने कहा, ‘उदाहरण के लिए हमने सरदार पटेल की इस इतनी बड़ी मूर्ति को समय पर पूरा किया.’ इस पर सभागार में हंसी के ठहाके और तालियों की गड़गड़ाहट सुनायी दी. उन्होंने कहा, ‘यह दिखाता है कि जब चाह होती है तो राह भी है. लेकिन क्या इस तरह की चाह हम अन्य चीजों के लिये भी देख सकते हैं? शक्ति के अत्यधिक केंद्रीकरण के अलावा उन्होंने भारत में नौकरशाही की अनिच्छा को एक बड़ी समस्या बताया. सार्वजनिक क्षेत्र में पहल को लेकर अनिच्छा को भी उन्होंने बड़ी समस्या बताया. उन्होंने कहा कि जब से भारत में भ्रष्टाचार और घोटाले उजागर होने शुरू हुए, नौकरशाही ने अपने कदम पीछे खींच लिए. भोपाल में 1963 में जन्मे राजन भारतीय रिजर्व बैंक के 23वें गवर्नर रहे हैं. वह सितंबर 2013 से सितंबर 2016 तक भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे.

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