राजा भैया ने मुसलमानों के पक्ष में दिया बयान, कहा अयोध्या मुद्दे पर SC जो कहेगा…

November 17, 2018 by No Comments

लखनऊ: लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में दो नयी पार्टियों का उदय हुआ है एक तो समाजवादी पार्टी से ही टूट कर बनी है तो दूसरी राजा भैया की पार्टी है. राजा भैया जोकि निर्दलीय विधायक हैं, उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा कर दी है. ऐसे में अब ये भी चर्चा है कि वो अपना वोट-बैंक सवर्ण और मुस्लिम को बनाएँगे. पच्चीस साल के अपने राजनैतिक करियर में राजा भैया ने कभी इसका दामन थामा तो कभी उसका लेकिन किसी पार्टी में नहीं शामिल हुए.

शुक्रवार को हुई प्रेस कांफ्रेंस में राजा भैया ने जो संकेत दिए हैं वो किसी भी पार्टी के लिए चौंकाने वाले हैं. उन्होंने एक ही तीर से भाजपा और सपा-बसपा पर निशाना साधा है.उन्होंने अपने राजनीतिक एजेंडा में सवर्ण को मुख्य रूप से माना है. यही वजह है कि उन्होंने एससी-एसटी एक्ट और आरक्षण के खिलाफ आवाज बुंलद करने की बात कही है. राजा भैया ने कहा कि मौजूदा समय में कई राजनीतिक पार्टियां हैं लेकिन वे सिर्फ जातिवाद और आरक्षण की राजनीति कर रही हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी उन लोगों की आवाज बनेगी जो एससी/एसटी एक्ट के शिकार हैं और आरक्षण की वजह से बेरोजगार हैं. राजा भैया कहते हैं कि आज अगर किसी दलित की लड़की के साथ बलात्कार होता है तो उसके लिए अलग मुआवजे का प्रावधान है. अगर वहीं सामान्य वर्ग के साथ ऐसा हुआ तो सरकार का रवैया अलग होता है.

राजा भैया ने प्रमोशन में आरक्षण का भी विरोध किया. उन्होंने कहा, “आज आरक्षण में प्रमोशन की बात हो रही है, मेरा मानना है कि प्रमोशन गुणवत्ता और वरिष्ठता के आधार पर होना चाहिए, न कि जाति के आधार पर.” मौजूदा आरक्षण की व्यवस्था को लेकर भी राजा भैया ने सवाल खड़े किए और कहा कि आरक्षण योग्यता के आधार पर हो. जिन आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के बच्चे विदेशों में पढ़ रहे हैं उन्हें आरक्षण का लाभ क्यों दिया जाए? राजा भैया ने जहां सवर्ण वोट बैंक को साधने की रणनीति अपनाई है.

वहीं, साथ ही मुस्लिम मतों को लेकर भी एक लकीर खींची है. राजा भैया ने अपनी जनसत्ता पार्टी के झंडे में दो रंग शामिल किए हैं. पहला पीला और दूसरा हरा. पीला रंग राजपूतों से जोड़कर देखा जाता है. जबकि हरे रंग को मुस्लिम समुदाय में पवित्र माना जाता है. राजा भैया ने अयोध्या मुद्दे के विषय में कहा कि जो भी फ़ैसला सुप्रीम कोर्ट लेगा, वो सभी को मानी होना चाहिए. उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज भी इसी बात को बार बार कह रहा है.

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