राजस्थान: टिकट नहीं मिलने से नाराज़ मुस्लिम नेता ने छोड़ी भाजपा..

जयपुर: राजस्थान में सात दिसंबर को होने वाले चुनाव में भाजपा के प्रत्याशियों की पहली सूची के नामों से सारे कयास धरे रह गए और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे 131 प्रत्याशियों की सूची में से 85 मौजूदा विधायकों को टिकट दिलाने में कामयाब रहीं। हालांकि पार्टी ने टिकट वितरण में पूरा संतुलन कायम करने की कोशिश् की है, क्योंकि राजे की सरकार के नौ मंत्रियों के टिकट पहली सूची में नहीं आए है वहीं संघ पृष्ठभूमि के नेताओ को भी पर्याप्त मौका दिया है। पार्टी ने हालांकि एक भी मुस्लिम चेहरे को अभी तक मैदान में नहीं उतारा है.

टिकट कटने से खफा होकर नागौर विधायक हबीबुर्रहमान ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. हबीबुर्रहमान के बीजेपी छोड़ देने से नागौर की राजनीति में उथलपुथल मची हुई है. नागौर में अल्पसंख्यक समुदाय का बड़ा वोट बैंक हैं. वहीं उनका इस्तीफा एक खामी की वजह से भी चर्चा का विषय बना हुआ है.हबीबुर्रहमान ने अपना इस्तीफा प्रदेशाध्यक्ष मदनलाल सैनी को ई-मेल के जरिये भेजा है. लेटरपैड पर भेजे गए इस इस्तीफे में एक चूक रह गई. इस्तीफे में प्रदेशाध्यक्ष मदनलाल सैनी की जगह प्रभुलाल सैनी लिख दिया गया. यह इस्तीफा सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है और लोग इसके जमकर मजे ले रहे हैं. लोगों की प्रतिक्रिया है कि टिकट कटते ही विधायक प्रदेशाध्यक्ष का नाम ही भूल गए. विधायक के कार्यकर्ताओं ने इसे तकनीकी खामी बताते हुए कहा कि इस्तीफा मदनलाल सैनी को ही मेल किया गया है.

हबीबुर्रहमान को नागौर में अल्पसंख्यकों का बड़ा वोट बैंक है.ऐसे में हबीबुर्रहमान का टिकट कटने से लोग हैरान हैं. बड़े अल्पसंख्यक वोट बैंक की वजह से हबीबुर्रहमान को यहां मजबूत नेता माना जाता है. नागौर में अल्पसंख्यकों के करीब 60 हजार वोट हैं. दूसरा बड़ा वोट बैंक जाटों का है. यहां जाट समाज के करीब 55 हजार वोट हैं. नागौर सीट पर कुल 241572 वोट हैं. टिकट वितरण में वंशवाद खूब चला और न सिर्फ दिवगंत नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट दिए गए, बल्कि जिन नेताओं के टिकट काटे गए, उनमें से भी कुछ बड़े चेहरों के परिजनों को टिकट दे दिया गया। जातिगत समीकरण साधने की भी पूरी कोशिश की गई है। पार्टी से नाराज चल रहे राजपूत समुदाय के 17 नेताओं को टिकट दिए गए हैं।

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