राजस्थान: राजे सरकार ने बनाया अपने लिए कवच, सरकारी अधिकारी के खिलाफ शिकायत करना किया मुश्किल

राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार ने एक विधानसभा सत्र में एक बिल पास करने जा रही है, जिसके तहत अब पूर्व और वर्तमान जजों, मजिस्ट्रेटों और सरकारी कर्मियों के खिलाफ पुलिस या कोर्ट में शिकायत करना बहुत मुश्किल हो जायेगा। खबर के मुताबिक इन लोगों के खिलाफ पुलिस या कोर्ट में शिकायत करने के लिए सरकार की इजाजत लेनी अनिवार्य हो जायेगी।

ड्यूटी के दौरान यदि सरकारी कर्मचारियों के​ खिलाफ कोई शिकायत की जाती है तो उसके खिलाफ सरकार की इजाजत केे बिना कोई एफआईआर दर्ज नहीं हो सकती। इस बिल में जरिए सीआरपीसी में धारा 156 (3) और 190 (1) को जोड़ा गया है जो एक मजिस्ट्रेट को अपराध का संज्ञान लेने और एक जांच का आदेश देने के लिए सशक्त बनाता है। इसमें ये प्रावधान होगा कि सरकार 180 दिनों के अंदर मामले की छानबीन करने के बाद मंजूरी देगी या उसे खारिज करेगी।

अगर 180 दिनों में ऐसा नहीं करती है तो माना जाएगा कि सरकार ने जांच की मंजूरी दे दी है। इसके साथ किसी भी सरकारी कर्मी, जज या अधिकारी का नाम या कोई अन्य पहचान तब तक प्रेस रिपोर्ट में नहीं दे सकते। मीडिया 6 महीने तक किसी भी आरोपी के खिलाफ न तो कुछ दिखाएगी और न ही छापेगी, जब तक कि सरकारी एजेंसी उन आरोपों के मामले में जांच की मंजूरी न दे दे।

इसका उल्लंघन करने पर दो साल की सजा का भी प्रावधान किया गया है। राजे सरकार का ये कदम सभी विधायकों, मंत्रियों, सांसदों और अफसरों के लिए उनका एक कवच समझा जा सकता है। जिससे अधिकारियों के खिलाड़ किसी भी तरह की कार्रवाई करने के पुलिस या अदालत में शिकायत करना बेहद मुश्किल हो जाएगा।

गौरतलब है की इन 180 दिनों तक अगर सरकार आरोपी अधिकारी के खिलाफ किसी तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं की जाती है तो इस बड़े अंतराल में आरोपी द्वारा सबूतों के साथ कुछ भी किया जा सकता है।
सरकार ने मीडिया की आजादी पर भी रोक लगा दी है। सरकार पूरे सिस्टम को अपने हाथों में लेने की कोशिशों में हैं। आप सिस्टम को लेकर सवाल नहीं कर सकते।

 

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