रोहिंग्या के ख़िलाफ़ सैन्य कार्यवाही बंद करे म्यांमार: UN चीफ़

नीपीटा, म्यांमार: संयुक्त राष्ट्र के सेक्रेटरी जनरल अंतोनियो गुटेरेस ने रोहिंग्या मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है. गुटेरेस ने म्यांमार सरकार से कहा है कि रोहिंग्या के ख़िलाफ़ सैन्य कार्यवाही बंद करें.

इसके पहले

म्यांमार की डी फैक्टो नेता और स्टेट काउंसलार औंग सैन सू की ने उनके ऊपर रोहिंग्या मुद्दे को लेकर बढ़ रहे दबाव के बीच अगले हफ्ते होने वाली यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली की डिबेट में मौजूद ना रहने का फ़ैसला किया है.

सू की सरकार पर मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोप लग रहे हैं. उत्तरी म्यांमार में स्थित रखीने प्रांत में रहने वाले रोहिंग्या मुसलमानों पर अत्याचार इस क़दर बढ़ गया है कि 3 लाख 70 हज़ार रोहिंग्या लोग जान बचाने के लिए बांग्लादेश, नेपाल और भारत में आ गए हैं.

गाँव के गाँव जला दिए गए हैं. संयुक्त राष्ट्र में भी इस बारे में कई लोगों ने अपनी बात राखी है कि NLD की सरकार नरसंहार कर रही है. हालाँकि म्यांमार की सेना का कहना है कि वो सिर्फ़ रोहिंग्या अलगाववादियों पर कार्यवाही कर रहा है और नागरिकों को कोई छति नहीं पहुंचाई जा रही है.

इस बारे में चर्चा करने के लिए संयुक्त राष्ट्र में बुधवार को बैठक होगी.

सु की की लगातार हो रही है आलोचना
रोहिंग्या मुसलमानों की समस्या पर ख़ामोशी इख्तियार कर बैठी हुईं म्यांमार की स्टेट काउंसलर औंग सन सू की की आलोचना दिन-ब-दिन तेज़ होती जा रही है. नोबेल विजेता सू की से अब उनका पुरूस्कार वापिस लेने तक की मांग उठने लगी है. इस बीच विरोध के सुर में एक और सुर जोड़ा है 1984 नोबेल शान्ति पुरूस्कार विजेता डेस्मंड टूटू ने.टूटू ने सू की को एक खुला पत्र लिखा है. इस पत्र के ज़रिये उन्होंने कहा है कि अगर म्यांमार की सत्ता पर क़ाबिज़ होने की क़ीमत आपकी ख़ामोशी है तो ये क़ीमत बहुत बड़ी है.

उन्होंने कहा था कि सालों से मेरी मेरे डेस्क पर आपकी एक तस्वीर थी जो आपके म्यांमार के लोगों के लिए दिए बलिदान को याद दिलाती थी. टूटू के ख़त में चिंता साफ़ नज़र आ रही है. टूटू कहते हैं कि इंसान भले ही अलग दिखे अलग तरह से पूजा करे लेकिन इंसान एक परिवार है. उन्होंने कहा कि भेदभाव नैचुरली नहीं आता, ये हमें सिखा दिया जाता है.

उनके इलावा मलाल युसुफ़ ज़ई ने भी सू की की आलोचना की है.

भारत में प्रदर्शन
रोहिंग्या मुद्दे पर म्यांमार सरकार के रवैये को लेकर भारत में भी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. इस बारे में कई संस्थाओं ने विरोध प्रदर्शन किये हैं और नोबेल विजेता औंग सैन सू की से नोबेल शान्ति पुरूस्कार वापिस लेने की मांग भी की गयी है. पांडिचेरी यूनिवर्सिटी में भी इसको लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ. सोशल मीडिया पर भी भारत के लोगों ने इस मुद्दे पर सक्रियता दिखाई है.

रोहिंग्या मुसलमानों की मदद करने सिख पहुंचे बांग्लादेश

भारत के सिख समुदाय की खालसा ऐड के लोग भी बांग्लादेश-म्यांमार बॉर्डर पर पीड़ित रोहिंग्या समुदाय के मदद के लिए पहुचे.खालसा ऐड के मैनेजिंग डायरेक्टर अमरप्रीत ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि वहां के हालात बहुत खराब है,तीन लाख के आसपास लोग पलायन करके बंगलादेश में आये है इतने लोगो को खाना पानी देना एक चुनौती है.

अमरप्रीत सिंह ने बताया कि हमारी टीम शर्णार्थियों को लंगर और पानी की व्यवस्था शुरू की है. उन्होंने कहा कि टेकनफ कस्बा (जहां रोहिंग्या शरणार्थी कैंप में रह रहे हैं) बांग्लादेश की राजधानी ढाका से 10 घंटे की दूरी पर है, ऐसे में हम ढाका से खाने-पीने का सामान ला सकते हैं, हालांकि बारिश एक बड़ी समस्या बन रही है.

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