रोहिंग्या के मुद्दे पर म्यांमार सरकार संयम और समझदारी से काम ले: भारत

नई दिल्ली: विदेश मंत्रालय ने आज बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के म्यांमार दौरे पर रखीने में रोहिंग्या मुसलमानों की समस्या पर बात हुई था. भारत ने रखीने प्रांत में स्थिति पर चिंता जतायी और साथ ही इस रीजन से रिफ्यूजी का आना भी चिंताजनक माना.

मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री के दौरे पर म्यांमार को भरोसा दिलाया गया है कि जिस प्रकार की मदद चाहिए होगी वो भारत करेगा.

बयान में कहा गया है कि ये बहुत ज़रूरी है कि इलाक़े में हिंसा ख़त्म हो और जल्दी से रखीने में नार्मल वातारण की स्थापना हो.

इसके अतिरिक्त म्यांमार सरकार से अपील की गयी है कि इस मामले में पूरी समझदारी और संयम का काम लेना चाहिए.

भारत ने रखीने प्रांत में आम लोगों और सिक्यूरिटी फोर्सेज के लोगों के मारे जाने पर भी चिंता जतायी.

गौरतलब है कि रोहिंग्या मुसलमानों के नरसंहार के मामले में पूरे विश्वभर में म्यांमार की स्टेट काउंसलर औंग सन सू ची की निंदा हो रही है. सू ची ने इस मामले पर अपना पक्ष रखते हुए न्यूज़ एजेंसी ANI को कहा कि ये समस्या औपनिवेशिक काल से भी पहले की है, 18 महीनों में हमसे ये उम्मीद करना कि हम इसे सुलझा लेंगे थोड़ा ठीक नहीं है.एक भारतीय पत्रकार के सवाल पर सू ची ने कहा कि हमारे लिए ये तय करना मुश्किल हो पा रहा है कि कौन आतंकवादी है और कौन मासूम, शायद भारत में आप कर लेते होंगे.

अब तक रोहिंग्या मुसलमानों के नरसंहार में 1000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं जबकि लाखों लोग बेघर हो गए हैं. आंकड़ो के मुताबिक़ पिछले दो हफ़्तों में 270000 से अधिक लोगों को देश छोड़ना पड़ा है.

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