रोहिंग्या लोगों को बाढ़ से बचाने के लिए बंगलादेशी सेना ने संभाला मोर्चा

बांग्लादेश में हो रही भारी बारिश की वजह से कॉक्स बाज़ार में रोहिंग्या रिफ्यूजी के लिए हालात और गंभीर हो गए हैं. इन हालातों से निबटने के लिए बांग्लादेशी सरकार ने सेना का सहारा लिया है. बंगलादेशी सेना रोहिंग्या लोगों की मदद के लिए सारे इन्तिज़ाम और कोशिशें कर रही है. 420000 से अधिक रिफ्यूजी बांग्लादेश में शरण लेने आये हैं. म्यांमार के रखीने प्रांत में रोहिंग्या लोगों के ख़िलाफ़ हो रहे “नरसंहार” से बचने के लिए लोग बांग्लादेश, नेपाल और भारत जैसे देशों में पहुंचे हैं. बंगलादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने रोहिंग्या लोगों के लिए विशेष इन्तिज़ाम किये हैं. इसके अतिरिक्त उन्हें दुनिया के कई दूसरे देशों से मदद मिल रही है. इसमें तुर्की, सऊदी अरब,ब्रिटेन जैसे देश शामिल हैं. संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियां भी मदद के काम में लगी हैं.

दूसरी तरफ़ म्यांमार के दूसरे उप-राष्ट्रपति हेनरी वन थिओ ने अपने यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली के भाषण में कहा कि अब हालात पहले से बेहतर हैं. वन थिओ ने कहा,”मुझे आपको ये जानकारी देते हुए ख़ुशी हो रही है कि अब हालात बेहतर हैं”. 5 सितम्बर से कोई भी झड़प की ख़बर ना होने की ख़बर है. हालाँकि थिओ ने रोहिंग्या शब्द का प्रयोग नहीं किया लेकिन उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ये पता करने की कोशिश करेगी कि मुस्लिम उनका देश छोड़कर क्यूँ जा रहे हैं.

म्यांमार सरकार और सेना की दुनिया भर के कई देशों ने निंदा की है. फ़्रांसिसी राष्ट्रपति इम्मानुएल मक्रों ने रोहिंग्या लोगों के ऊपर हूँ रही ज़्यादतियों को “नरसंहार” बताया है. ब्रिटेन, तुर्की, और संयुक्त राज्य अमरीका जैसे देशों ने म्यांमार की निंदा की है.

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