रोहिंग्या मुसलमानों के नरसंहार पर नोबेल शान्ति विजेता ने औंग सन सू की को लिखा खुला पत्र

प्रीटिरिआ/रखीने/न्यीपीटो: रोहिंग्या मुसलमानों की समस्या पर ख़ामोशी इख्तियार कर बैठी हुईं म्यांमार की स्टेट काउंसलर औंग सन सू की की आलोचना दिन-ब-दिन तेज़ होती जा रही है. नोबेल विजेता सू की से अब उनका पुरूस्कार वापिस लेने तक की मांग उठने लगी है. इस बीच विरोध के सुर में एक और सुर जोड़ा है 1984 नोबेल शान्ति पुरूस्कार विजेता डेस्मंड टूटू ने.

टूटू ने सू की को एक खुला पत्र लिखा है. इस पत्र के ज़रिये उन्होंने कहा है कि अगर म्यांमार की सत्ता पर क़ाबिज़ होने की क़ीमत आपकी ख़ामोशी है तो ये क़ीमत बहुत बड़ी है.

उन्होंने कहा कि सालों से मेरी मेरे डेस्क पर आपकी एक तस्वीर थी जो आपके म्यांमार के लोगों के लिए दिए बलिदान को याद दिलाती थी. टूटू के ख़त में चिंता साफ़ नज़र आ रही है. टूटू कहते हैं कि इंसान भले ही अलग दिखे अलग तरह से पूजा करे लेकिन इंसान एक परिवार है. उन्होंने कहा कि भेदभाव नैचुरली नहीं आता, ये हमें सिखा दिया जाता है.

टूटू के इलावा एक और नोबेल शान्ति पुरूस्कार विजेता ने सू की के रवैये पर चिंता जताई. मलाला यूसुफ़ज़ई ने सोमवार को कहा था कि रोहिंग्या मुसलमानों के ऊपर हो रहे अत्याचार पर वो कुछ करेंगी इसकी विश्व के लोग बहुत दिन से उम्मीद कर रहे हैं.

सू की ने इस मामले पर अपना पक्ष रखते हुए न्यूज़ एजेंसी ANI को कहा कि ये समस्या औपनिवेशिक काल से भी पहले की है, 18 महीनों में हमसे ये उम्मीद करना कि हम इसे सुलझा लेंगे थोड़ा ठीक नहीं है.एक भारतीय पत्रकार के सवाल पर सू की ने कहा कि हमारे लिए ये तय करना मुश्किल हो पा रहा है कि कौन आतंकवादी है और कौन मासूम, शायद भारत में आप कर लेते होंगे.

अब तक रोहिंग्या मुसलमानों के नरसंहार में 1000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं जबकि लाखों लोग बेघर हो गए हैं. आंकड़ो के मुताबिक़ पिछले दो हफ़्तों में 270000 से अधिक लोगों को देश छोड़ना पड़ा है.

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