रोहिंग्या मुसलमानों की मदद के लिए आगे आया भारत; मोदी सरकार ने उठाया ये बड़ा क़दम

नई दिल्ली-एक तरफ भारत सरकार का गृह मंत्रालय रोहिंग्या मुस्लिमो को वापस म्यांमार भेजने को लेकर बयानबाजी ऐसे कर रहे है जिससे ये स्पष्ट नही हो रहा है कि भारत सरकार रोंहिया रिफ्यूजी को वापस भेजने का सोच रही है या फिर देश में रहने दिया जायेगा.

लेकिन बंगलादेश के भारत में हाई कमिश्नर सएड मुआज्ज़ेम अली ने बयाँन दिया है कि भारत भी हवा और समुंदरी रास्ते से बांग्लादेश के रोहिंग्या मुस्लिमो को राहत सामग्री की खेप भेजेगा.

catch news में छपी एक खबर के अनुसार बांग्लादेश के सूत्रों के अनुसार भारत के दो अधिकारीयो ने बांग्लादेश के कॉक्स बाज़ार स्थित राहत शिविरों का दौरा करके राहत सामग्री की कितनी ज़रूरत है इसका अनुमान लगा रहे है.

वही बंगला देश के हाई कमिशनर ने कैच न्यूज़ से बातचीत में उम्मीद जताई कि सुरक्षा परिषद में भी भारत म्यांमार पर दबाब डालकर रोहिंग्या समुदाय को वापस अपने देश में पुर्नानिर्वासित करने में मदद करेगा.

बांग्लादेश के डिप्लोमेट ने भारत सरकार के रोहिंग्या मुस्लिमो के ऊपर दिए गये ब्यान को अच्छा बताते हुए कहां कि भारत के विदेश मंत्रालय ने नौ सितम्बर को अपने ब्यान में म्यांमार सरकार को निर्दोष की जाने ना जाए इस की हिदायत दे चुकी है.

वही बांग्लादेश के हाई कमिश्नर ने कहा कि रोहिंग्या समुदाय को सिर्फ मुस्लिमो की समस्या ना समझी जाए बड़ी संख्या में हिन्दू रोहिंगा भी म्यांमार से भागकर बांग्लादेश में आये है.

वही 12 सितम्बर को बांग्लादेश के पीएम शेख हसीना वाजिद रोहिंग्या मुस्लिमो से राहत शिविरों का दौरा किया .म्यांमार से आये रोहिंग्या समुदाय के लोगो से मिलकर वो भावुक हो गयी और उन्होंने कहा कि म्यांमार सरकार के इस तरह के मानवीय अत्याचार की निंदा करने के लिए उनके पास शब्द नही है.

बंगलादेश के पीएम शेख हसीना वाजिद ने कहा कि वो पडोसी देश म्यांमार से दोस्ताना सम्बन्ध चाहती रही है और म्यांमार को अपने नागरिको को वापस सम्मान के साथ अपने देश में बुलाना चाहिए.

उन्होंने म्यांमार को चेतावनी देते हुए कहा कि बांग्लादेश इस तरह की नाइंसाफी का विरोध करेगा,हम इस तरह के अत्याचार को स्वीकार नही कर सकते है हम नाइंसाफी नही होने देंगे.

उन्होंने कहा कि जब बांग्लादेश में 16 करोड़ लोग रह सकते है फिर हम 7 लाख रोहिंग्या समुदाय को क्यों नही पनाह दे सकते है.उन्होंने राहत शिविरों में रोहिंग्या समुदाय को विश्वास दिलाया कि बांग्लादेश उनकी हर तरह से सहायता करेगा.

हसीना ने कहा, ‘जब तक वो अपने देश नहीं लौट जाते तब तक हम उनके साथ खड़े रहेंगे.’म्यांमार में ताज़ा हिंसा के कारण कम से कम 313,000 रोहिंग्या बांग्लादेश पहुंचे हैं.

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