रोहिंग्या मुसलमानों की मदद को फिर आगे आया तुर्की; अब लिया ये एहम फ़ैसला

अंकारा: म्यांमार के रखाइन प्रांत से अपनी जान बचाने को बांग्लादेश आये रोहिंग्या रिफ्यूजी लोगों की मदद के लिए कई देश आगे आ रहे हैं. इनमें बांग्लादेश और तुर्की जैसे देशों ने मुख्य भूमिका निभायी है.

इसी सिलसिले में तुर्की के उप-प्रधानमंत्री हकन जवुसोग्लू ने रोहिंग्या मुसलमानों के लिए एक बड़ा एलान किया है. उन्होंने एलान किया है कि 53 रोहिंग्या मुस्लिम छात्रों को तुर्की यूनिवर्सिटी स्कालरशिप देगा.

अनादोलू न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक़ उन्होंने बताया है कि कई रोहिंग्या छात्र तुर्की के विश्विद्यालयों में पढ़ रहे हैं. उन्होंने इसके अलावा कहा कि तुर्की लगातार बंगलदेश के कैम्पों में रोहिंग्या मुसलमानों की मदद कर रहा है. उन्होंने कहा,”हम मोबाइल हेल्थ क्लिनिक बनायेंगे”.

म्यांमार के रखाइन प्रांत से 5 लाख से अधिक रिफ्यूजी बांग्लादेश आये हैं. इसमें अधिकतर मुसलमान हैं जबकि कुछ हिन्दू और दूसरे समुदाय से ताल्लुक़ रखते हैं.

इस मामले में कई देशों ने म्यांमार के रवैये की आलोचना की है. फ़्रांस, संयुक्त राज्य अमरीका, तुर्की जैसे देशों ने म्यांमार सरकार की निंदा की है और रोहिंग्या लोगों के साथ हो रहे ज़ुल्म को क़त्ल-ए-आम का नाम दिया है. वहीँ बांग्लादेश ने रोहिंग्या लोगों के लिए बड़ी व्यवस्था की है. बंगलादेशी प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने साफ़ कहा कि अगर उनका देश 16 करोड़ लोगों को खिला सकता है तो 7-8 लाख रोहिंग्या को भी.

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना का सुझाव

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने संयुक्त राष्ट्र की 72वीं आम सभा में बोलते हुए कहा पांच बिंदु के सुझाव दिए थे. इस मुद्दे को हल करने के लिए हसीना ने पांच सुझाव दिए हैं-

1. म्यांमार को तुरंत ही हिंसा को रोक देना चाहिए और नरसंहार की परम्परा को रोक देना चाहिए.
2. सेक्रेटरी जनरल को म्यांमार में एक फैक्ट फाइंडिंग मिशन भेजना चाहिए.
3. म्यांमार के अन्दर संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में “सेफ़ ज़ोन”बनाए जाने चाहियें.
4. रोहिंग्या रिफ्यूजी के वापस म्यांमार में जाने की व्यवस्था की जाए.
5. कोफ़ी अन्नान कमीशन की सिफ़ारिशों को तुरंत बिना किसी शर्त के लागू किया जाए.

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