“रोहिंग्या शब्द से लोगों के जज़्बात भड़कते हैं, रोहिंग्या की जगह मुस्लिम शब्द का प्रयोग करना बेहतर है”

न्यिपिताव: रोहिंग्या नरसंहार और म्यांमार से उनके मजबूरन पलायन करके बांग्लादेश, नेपाल और भारत जैसे देशों में रिफ्यूजी बन के रहने को लेकर म्यांमार की स्टेट काउंसलर औंग सैन सू ची लगातार आलोचना के घेरे में रही हैं.

इसी बीच नोबेल शांति पुरूस्कार विजेता नेत्री ने भारतीय समाचार एजेंसी ANI को एक इंटरव्यू दिया है. इस इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि आख़िर उन्होंने अपने बयान में रोहिंग्या शब्द का प्रयोग क्यूँ नहीं किया तो उन्होंने कहा कि कुछ लोग ऐसे हैं रखीने में जो ख़ुद को रोहिंग्या कहलवाना चाहते हैं या मुसलमानों को रोहिंग्या कहना चाहते हैं और रखीने (एथनिक प्रजाति वाले) उनके लिए बंगाली के इलावा कोई और टर्म का प्रयोग नहीं करना चाहते.

सू ची ने साथ ही कहा कि बेहतर ये है कि उन्हें मुस्लिम कहा जाए क्यूंकि ये एक ऐसा विवरण है जिससे कोई इनकार नहीं कर सकता. उन्होंने कहा कि हम रखीने प्रांत की मुस्लिम कम्युनिटी के बारे में बात कर रहे हैं और दूसरे टर्म्स भी उस कम्युनिटी पर लागू होते हैं लेकिन मुझे नहीं लगता ऐसे टर्म का प्रयोग होना चाहिए जिससे जज़्बात भड़कें.

उन्होंने कहा कि वो रखीने में शांति और भाईचारा चाहती हैं. सू ची ने कहा कि वो किसी एक कम्युनिटी पर आरोप नहीं लगाना चाहती. उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार लोगों के लिए काम कर रही है और लोगों की मदद करने में वो ये फ़र्क़ नहीं कर रही है कि वो मुस्लिम हैं या हिन्दू या रखीने. उन्होंने कहा कि कम आबादी वाली हिन्दू कम्युनिटी को भी वहाँ हिंसा झेलनी पड़ी है.

गौरतलब है कि रोहिंग्या मुसलमानों के नरसंहार के मुद्दे पर म्यांमार सरकार और वहाँ की सेना की समूचे विश्व में आलोचना हो रही है. ब्रिटेन ने कल इसी बात से नाराज़ होकर म्यांमार में अपना मिलिट्री ट्रेनिंग कैंप रद्द कर दिया है. रोहिंग्या लोग अपनी जान बचाने के उद्देश्य से बड़ी संख्या में बांग्लादेश के रिफ्यूजी कैंप में रह रहे हैं. एक अनुमान के मुताबिक़ उनकी संख्या 7 लाख के क़रीब है.

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