रोहित सरदाना और संबित पात्रा पर अकेले भारी पड़े मौलाना मदनी,हर सवाल पर दिया धांसू जवाब

October 6, 2018 by No Comments

समय-समय पर राष्ट्रवाद के नाम पर धर्मों में बहस छिड़ती रहती है। धर्म के नाम पर राजनीति हमारे देश का एक अहम हिस्सा बन चुका है।टीवी चैनलों और अखबारों में आये दिन साम्प्रदाईक दंगे होने की खबरें सुनने को मिलती है। यही राजनीति पार्टियां ही अपने वोट बैंक के ख़ातिर देश में हमेशा चुनाव के दौरान जाती धर्म का कार्ड खेलती है और इससे सबसे ज्यादा आम इंसान प्रभावित होता है और वह भावनाओं में आकर अपने वोट को धर्म की झोली में डाल देता है।

मुस्लिमों को बदनाम करने की कोशिश

जामिया-उलेमा-ए-हिन्द के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि भारत देश मे मुसलमानों को बदनाम करने की हमेशा साज़िस रची जाती है। देश मे मुस्लिम समुदाय की क्षवि को जानबूझकर ख़राब की जाती है। उन्होंने ने कहा कि हमारे धर्म के बारे में गलत अफवाहों का विस्तार किया है जिससे लोग हमेशा हमे शक की नज़र से देखते है।

भारतीय मुस्लिमों में देखते है आतंकवाद

प्रतिष्ठित न्यूज़ चैनल के डिबेट में जहाँ भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा और दूसरे पार्टियों के नेता के साथ साथ जामिया-उलेमा-ए-हिन्द के महासचिव मौलाना महमूद मदनी भी मौजूद थे। बहस के दौरान मौलाना ने मुसलमानों की यरफ से कपनी आवाज़ उठाते हुए सवाल किया कि देश मे हर मुसलमान को आतंकवादी की नज़र से क्यों देखा जाता है? उन्होंने ने कहा कि जब भी हम कही सफर करते है या हमारे आस पास कोई दूसरे धर्म के लोग बैठे होते है तो उनका हमे दलहन का नजरिया की बयाँ कर देता है कि आखिरकार वो हमारे प्रति किस प्रकार की भावना रखते है।

मुसलमानों को झेलनी पड़ती है शर्मिंदगी

उन्होंने ने यह भी आरोप लगाया कि ट्रिपल तलाक पर भी मुसलमान को बदनाम किया गया लेकिन अगर औरों की हमसे तुलना कराई जाए तो निश्चित ही हमारा अनुपात उनसे कम ही होगा। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे धर्म को लोगों ने इस कदर बदनाम कर दिया है कि हमे अब काफी जगहों पर शर्मिंदगी झेलनी पडती है।

संबित पात्रा ने रखा पक्ष

मौलाना की बातों का जवाब देते हुए बहस में संबित पात्रा ने कहा कि हां हम मानते हैं कि आपको शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है और यह है तो हम आप का दुख हम समझते है। जिस प्रकार आप कह रहे हैं कि हम आतंकवाद को धर्म से जोड़ते हैं ऐसा बिल्कुल नहीं है, परंतु यह बात भी सत्य है कि अगर आतंकवाद का नाम अब्दुल है तो उसे उसी नाम से बुलाएंगे और अगर उसका नाम हिंदू का नाम श्याम सुंदरा तुम सुंदर नाम से बुलाने का मतलब यह है कि धर्म के नाम पर राजनीति करते हैं। और अगर ऐसा होता है तो बिल्कुल गलत है। साथ ही साथ ही कहा कि हम यह बात साफ कर देना चाहते हैं कि अगर आपको पब्लिक प्लेस पर शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है तो इसका कारण मोदी नही है।

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