साली को आधी घरवाली कहने वाले मौलाना का ये बयान जरुर पढ़े..

March 2, 2019 by No Comments

यह बात तो हम सब जानते हैं कि बीवी की बहन के लिए हमारे समाज में साली का लफ्ज इस्तेमाल किया जाता है।लफ़्ज़ अगरचे कुछ मुनासिब नहीं लगता,लेकिन इसी नाम से बात शुरू करते हैं।उमूमन बीवी की बड़ी बहनें शादीशुदा होती हैं और अगर ग़ैर शादीशुदा भी हूँ तो वक़्त के साथ तबीयत में संजीदगी और बुर्दबारी आचुकी होती है।
जबकि बीवी की छोटी बहनें उम्र के इस मरहले में होती हैं जब ज़िंदगी का हर रुख़ ख़ूबसूरत और हर मोड़ दिलकश मालूम होता है।ऐसे में बहन का शादी होना और एक नए फ़र्द यानी बहनोई का घर से ताल्लुक़ होना भी एक मुनफ़रद रंग लिए होता है।मुआशरे के आम चलन की वजह से उमूमन ये छोटी साली अपने बहनोई से हंसी मज़ाक़ की बातें भी करती हैं और अपने बहनोई का ख़्याल भी बहुत रखती हैं।

जब कभी बहन का अपने मैके जाना हो तो अक्सर यही सालियाँ बहन और बहनोई को बोरीयत से बचाने के लिए उनको मुकम्मल वक़्त देती हैं।अब मर्द के रुख से कुछ बात हो जाएगी,हमारे मुआशरे में एक मुहावरा मशहूर है।साली आधे घर-वाली। अक्सर मर्द जब अपने अज़ीज़ दोस्तों में बैठते हैं तो छोटी सालियों के नाम पर एक अजीब मुस्कुराहट उनके चेहरे पर आ जाती है।और उनके दोस्त भी अपने जुमलों से इस मुस्कुराहट को मज़ीद गहिरा करने में मुआविन साबित होते हैं।
ये हक़ीक़त अजीब सही लेकिन बहर-ए-हाल मुआशरे में मौजूद है।अपने बहनोई के इस रुख से उनकी सालियाँ भी अक्सर बे ख़बर होती हैं।अब इस्लाम के रुख से इस पहलू को देखते हैं,इस्लाम में कहा गया है कि बहनोई साली का आपस में शरई पर्दा है।बहनोई,साली का नामहरम है और घर के अंदर गाहे-बा-गाहे उस की मौजूदगी की वजह से इस पर्दे में बहुत एहतियात की ज़रूरत है।ये ऐसी हक़ीक़त है जिससे लड़की के माँ बाप भी आँखें बंद किए रखते हैं।अक्सर बहनोई भी इस पर्दे को अपनी हतक समझते हैं।

चीनी मुस्लिम


और सालियाँ कहती हैं कि हमारे बहनोई तो हमारे भाई जैसे हैं की सोच के साथ इस से सर्फ ए-नज़र करती हैं।यह एक ऐसा ख़ामोश ज़हर है जिससे या तो वो मर्द वाक़िफ़ है या अल्लाह ताला की ज़ात उस के दिल का हाल जानती है।इस लिए बीवी के माँ बाप से गुज़ारिश है कि अपनी दीगर बेटीयों को दामाद से शरई पर्दा कराये,बीवी की बहनों से गुज़ारिश है कि ख़ुद ही पीछे पीछे रहा करें ताकि बहनोई को ये बावर हो कि मेरी सालियाँ झिझक और श्रम वाली हैं।
और मर्द हज़रात से गुज़ारिश है कि इस नसबी ताल्लुक़ के साथ माल-ए-मुफ़्त दिले बे रहम वाला मुआमला ना करें। और दिल के अंदर घटिया और फ़ुज़ूल ख़ाहिशात पालने से गुरेज़ करें।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *