सरदार पटेल आज होते तो मूर्ति को पैसे की बर्बादी मानते: सरदार पटेल के पोते

November 2, 2018 by No Comments

नई दिल्लीः भारत के ‘लौह पुरुष’ के नाम से मशहूर सरदार वल्लभ भाई पटेल की इस मूर्ति को भारत सरकार ने ‘स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी’ का नाम दिया है.गुजरात के अहमदाबाद से क़रीब 200 किलोमीटर दूर स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल की इस मूर्ति को बनाने में लगभग तीन हज़ार करोड़ रुपए ख़र्च हुए हैं. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को विश्व की सबसे ऊंची सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा का अनावरण किया। इस समारोह में भाजपा के कई दिग्गज नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शिरकत की। वहीं, सरदार वल्लभ भाई पटेल के रिश्तेदारों ने भी इसे लेकर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पटेल लंबे वक्त से इस सम्मान के हकदार थे। लेकिन उन्होंने कहा कि अगर सरदार पटेल अभी जिंदा होते तो वह इस श्रद्धांजलि के लिए कभी तैयार नहीं होते। उन्हें ये सब पैसे की बरबादी लगती।

सरदार पटेल के बड़े भाई सोमाभाई पटेल के पोते धीरूभाई पटेल ने कहीं। उन्होंने कहा कि अगर अहम विश्व की सबसे ऊंची इस प्रतिमा के बारे में उनसे पूछते तो वह इसके लिए मना कर देते। उन्होंने बहुत ही साधारण से माहौल में अपना जीवन व्यत्तीत किया है। वह पैसे की अहमियत समझते हैं। धीरूभाई ने कहा कि हमार पूरा परिवार सरदार वल्लभ को मिले इस सम्मान से बेहद खुश है। उन्होंने कहा कि सरदार वल्लभ को यह सम्मान पहले ही मिल जाना चाहिए था, वे इसके हकदार थे। उन्होंने आगे कहा कि अगर सरदार पटेल ने सुभाष चंद्र बोस के साथ थोड़ा और समय बिताया होता तो वह और ज्यादा ऊंचाइयों पर होते। बता दें कि धीरूभाई परिवार के 36 अन्य सदस्यों के साथ स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के अनावरण के कार्यक्रम में मौजूद थे।

बता दे कि दक्षिणी गुजरात के नर्मदा ज़िले में इस मूर्ति के आसपास रहने वाले लोग मानते हैं कि इतनी बड़ी रकम अगर सूबे के ज़रूरतमंदों को मदद के तौर पर दी जाती तो उनकी हालत काफ़ी सुधर सकती थी.ख़ासकर उन किसानों के हालात तो सुधर ही सकते थे जो नर्मदा नदी के किनारे तो रह रहे हैं पर अपने खेतों में पानी के लिए तरस रहे हैं.गुजरात के किसानों की माने तो सरकार की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहते हैं कि मूर्ति बनने में जो तीन हज़ार करोड़ रुपये ख़र्च हुए हैं, उसमें आधी से ज़्यादा धनराशि का योगदान गुजरात सरकार ने किया है और बाकी का पैसा केंद्र सरकार ने आवंटित किया था. एक रिपोर्ट के अनुसार इस मूर्ति को बनाने के लिए सार्वजनिक चंदा भी इकट्ठा किया गया था.किसान गुजरात सरकार के इस फ़ैसले से काफ़ी नाराज़ हैं.किसानों का कहना हैं, “एक विशालकाय मूर्ति पर इतना पैसा ख़र्च करने से अच्छा होता कि सरकार सूखा पीड़ित किसानों के लिए पानी की व्यवस्था तैयार कर देती.” बहरहाल पटेल के पोते और बेटी के इन बयानों ने विपक्ष की आलोचना को और धार दे दिया है। इस वक्त जबकि प्रतिमा के अनावरण को लोकसभा चुनाव 2019 की तैयारियों के रूप में भी देखा जा रहा है। इन बयानों के मायने रुख मोड़ भी सकते हैं।

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