न नदी है न झरना लेकिन सऊदी अरब सऊदी अरब है…

सऊदी अरब रेगिस्तान में बसा देश है जहां कोई स्थायी नदी या झरना नहीं है। देश में पानी कम मात्रा में ही उपलब्ध है और बेहद कीमती है। देश में पानी के संसाधनों को लेकर किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं हुई है लेकिन इसकी मांग लगातार बढ़ती ही जा रही है। जहाँ पर तेल इतना ज्यादा है की पानी से ज्यादा सस्ता तेल मिलता है।

सऊदी अरब ने तमाम परेशानियों के बावजूद ऐसे नए नए तरीके पैदा किए हैं जिससे वह अपने देश में पानी की मांग को पूरा कर पा रहा है। पानी से जुड़े सभी मामले वाटर एंड पावर मंत्रालय देख-रेख में आते हैं। सऊदी अरब में पानी का अहम स्रोत अकवीफर्स हैं। अकवीफर्सी में अंडरग्राउंड रूप से पानी को इक्क्ठा किया जाता है। साल 1970 में, सऊदी सरकार ने अकवीफर्स पर काम शुरू किया था। इसका नतीजा ये हुआ कि देश में हजारों अकवीफर्स बनाए गए। इन्हें शहरी और कृषि दोनों जरूरतों में इस्तेमाल किया जाता है।

देश में पानी का दूसरा अहम स्रोत समुद्र है। समुद्री पानी को पीने लायक बनाने की प्रक्रिया को डीसेलीनेशन कहते हैं। सऊदी अरब दुनिया में डीसेलीनेटेड वाटर का सबसे बड़ा स्रोत है। सेलीन वाटर कनवर्जन कॉर्पोरेशन (SWCC) 27 डीसेलीनेशन स्टेशन को ऑपरेट करता है और इससे 3 मिलियन क्यूबिक मीटर पोटेबल वाटर हर दिन निकलता है। ये प्लांट शहरों में इस्तेमाल होने वाले 70 फीसदी जल को उपलब्ध कराते हैं और साथ ही, इंडस्ट्रीज के इस्तेमाल लायक पानी भी उपलब्ध कराते हैं। इलेक्ट्रिक पावर जेनरेशन के भी ये अहम सोर्स हैं। आपको बता दें की समुद्र के पानी को पीने लायक बनाने की प्रक्रिया बहुत ही महंगी है। लेकिन अपने देश के लोगों के लिए सऊदी सरकार सालों से इसपर बेहताशा पैसे खर्च कर रही है। हालांकि इसके साथ-साथ पानी उपलब्ध कराने के और तरीकों पर भी काम किया जा रहा है। उम्मीद की जा सकती है जल्द ही पानी तेल से सस्ता मिल पाए।

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