ख़ाली सीटों के साथ शुरू हुआ सऊदी में बड़ा कार्यक्रम…

October 23, 2018 by No Comments

रियाद: सऊदी अरब की राजधानी में मंगल के रोज़ शुरू हुए फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव फोरम की शुरुआत पिछले साल के मुक़ाबले फीकी रही. इसकी वजह वरिष्ट पत्रकार जमाल खाशोग्गी की हत्-या के बाद सऊदी अरब पर पड़ रहा दबाव है.

सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान ने ये फोरम 2017 में बनाया था और तब ये ज़बरदस्त तरह से कामयाब रहा था. इस फोरम के ज़रिये सऊदी अरब ने अपनी नई इमेज दुनिया के सामने रखी थी. इस फोरम में सऊदी अरब ने नेओम नामक क्रॉस बॉर्डर सिटी की स्थापना की घोषणा की थी. जितना कामयाब पिछला फोरम हुआ था, इस बार उम्मीद है कि नहीं होगा. पहले दिन सामने की रो में सीटें ख़ाली देखी गयीं, कई अहम् अतिथि नहीं आये हैं.

कई बड़ी कम्पनियों ने इस फोरम में भाग लेने से इनकार कर दिया है जबकि कई बड़े नेताओं ने इस फोरम में आने से मना कर दिया है.HSBC होल्डिंग्स, क्रेडिट सुइस्से और स्टैण्डर्ड चार्टर्ड के चीफ़ एग्जीक्यूटिव ने इस सम्मलेन में भाग लेने से इनकार कर दिया है. जेपी मॉर्गन एंड चेस को चीफ़ एग्जीक्यूटिव जेमी दिमोन और फ़ोर्ड मोटर कंपनी के चेयरमैन बिल फ़ोर्ड ने सऊदी फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव कांफ्रेंस में भाग लेने को स्थगित कर दिया है. कई बड़ी समाचार एजेंसी ने इस कार्यक्रम में भाग लेने से इनकार कर दिया है.

इसमें CNN, दा फाइनेंसियल टाइम्स, दा न्यूयॉर्क टाइम्स, CNBC और ब्लूमबर्ग के नाम शामिल हैं. दा फ़ॉक्स बिज़नस नेटवर्क एकमात्र पश्चिमी समाचार एजेंसी बची है जो कांफ्रेंस में भाग लेने जा रही है. उबेर, वायाकॉम, ने भी इसमें शामिल होने से मना कर दिया है. स्टीव जॉब्स भी इस कांफ्रेंस में भाग लेने नहीं जा रहे हैं.

फोरम की पहली पैनल सऊदी बिज़नसवुमन लुबना ओलायण ने कहा कि आज सुबह हम यहाँ एकत्रित हुए हैं, तो ये वाजिब है कि हम सभी का ज़हन हाल ही में हुए इवेंट पर होगी जो जमाल खाशोग्गी की मौ-त से जुड़े हैं. उन्होंने खाशोग्गी की तारीफ़ करते हुए कहा कि वो एक लेखक, पत्रकार और हम में से कई लोगों के चहेते थे..अल्लाह उनकी आत्मा को शांति दे.

आपको बता दें कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान को एक उदारवादी नेता माना जाता था लेकिन पिछले दिनों उन पर ये आरोप लगे कि वो निरंकुश हैं. जमाल खाशोग्गी भी सऊदी सरकार की आलोचना करते थे, जानकार ये भी कह रहे हैं कि खाशोग्गी के साथ ये इसलिए हुआ क्यूंकि वो सऊदी सरकार के आलोचक थे.

ग़ौरतलब है कि सऊदी अरब की सरकार ने आख़िरकार ये मान लिया है कि पत्रकार जमाल खाशोग्गी की ह्त्-या कांसुलेट के अंदर ही हुई है. सऊदी सरकार ने रॉयल कोर्ट एडवाइजर अल क़हतानी और डिप्टी इंटेलिजेंस चीफ़ अहमद असीरी को बर्ख़ास्त कर दिया है. इस मामले में तुर्की ने कड़ा रुख़ अपनाया हुआ है. तुर्की की माँग है कि वरिष्ठ पत्रकार की ह्त्-या से जुड़े मामले की क़ानूनी प्रक्रिया तुर्की में ही चले.

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