SC ने लगाई भाजपा अध्यक्ष को फटकार, नहीं सूझा कोई जवाब

September 25, 2018 by No Comments

नई दिली: भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष और लोकसभा सांसद मनोज तिवारी की मुश्किलें बढ़ गई हैं, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के गोकुलपुर में एक गांव की सीलिंग तोड़ने के मामले में भाजपा सांसद मनोज तिवारी से एक हफ्ते में जवाब तलब किया है । सीलिंग मामले में अब सुप्रीम कोर्ट 8 अक्टूबर को सुनवाई करेगा, सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मनोज तिवारी के सीलिंग मुद्दे पर किए गए बर्ताव पर नाराजगी जताई और इसे गलत ठहराया ।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मनोज तिवारी को ऐसा नहीं करना चाहिए था, सुप्रीम कोर्ट ने मनोज को अगले हफ्ते पेश होने के लिए कहा है, और उनसे इस मामले पर जवाव तलब किया है । सुप्रीम कोर्ट ने मनोज तिवारी को उनके एक बयान पर जमकर फटकार लगाई जिसमें उन्होंने कहा था कि एक हजार जगहें ऐसी हैं, जो सील होनी चाहिए, ऐसे बयान देकर सांसद की गरिमा को तार तार कर दिया था ।

कड़ी टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप सुबह तक हमें 1000 संपत्तियों की एक लिस्ट दें, हम आपको सीलिंग अधिकारी ही बना देंगे, वहीं तिवारी के वकील ने कोर्ट से कहा कि ये लिस्ट ना मांगी जाए ये सांसद हैं, उन्होंने कहा कि मॉनीटरिंग कमेटी मनमानी कर रही है, इस पर कोर्ट ने पूरा ब्यौरा मांगा है कि कमेटी के हर सदस्य का ब्यौरा चाहिए और सील की हुई जमीन के पूरे कागजात।

गौरतलब है कि पूर्वांचल रैली में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की चुप्पी के बाद इस बात को और बल मिला कि केंद्र सरकार सीलिंग के मामले में सर्वोच्च न्यायालय की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती है इसलिए मनोज तिवारी को सुप्रीम कोर्ट में उपस्थित होना पड़ा ।दिल्ली में वर्तमान में सीलिंग एक बड़ा मुद्दा है, जो कांग्रेस के इस मुद्दे पर बाजी मारने पर भाजपा में चिंता व्याप्त थी। मनोज तिवारी ने एक कदम आगे बढ़ कर डेयरी की सील तोड़ दी।

भाजपा में चल रही गुटबाजी के चलते तिवारी पहले ही अकेले पड़ रहे थे, क्योंकि प्रदेश स्तर पर उनके साथ किसी ने भी कदम नहीं बढ़ाया उनके साथ। यही कारण है कि अनजाने में बीजेपी सांसद मनोज तिवारी खुद को एक चक्रव्ह्यू में फंसा लिया है ।

उधर सुप्रीम कोर्ट ने मनोज तिवारी से जवाब भी तलब कर लिया है, पूर्वांचल रैली में मनोज तिवारी ने अमित शाह के समक्ष सीलिंग का मामला उठा दिया, ताकि शाह के बोलते ही सभी नेता उनके साथ जुड़ जाएं लेकिन हुआ इसके उलटा, शाह ने चुप्पी साध ली तो फिर वे भाजपा में विरोधी धड़े के निशाने पर आ गए, फिर मनोज तिवारी के हाथ मायूसी हाथ लगी, जिससे पार्टी में रहते हुए भी तिवारी अकेले पड़ गए ।

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