“पत्रकारिता के नाम पर दलाली और भाषणबाज़ी हो रही है”

September 25, 2018 by No Comments

नई दिल्ली – फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने सनसनीख़ेज़ बात कही है। उन्होंने कहा कि राफेल डील में अंबानी का नाम उन्हें भारत सरकार की तरफ से दिया गया था। यह मामले भाजपा के लिये चिंता का सबब बना हुआ है, भाजपा पर राफेल घोटाले को लेकर विपक्षी पार्टियां आरोप लगा रही हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा रहे हैं, लेकिन गोदी मीडिया इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

गोदी मीडिया को फटकार लगाते हुए वरिष्ठ पत्रकार और इंडिया टूडे मैग्जीन के पूर्व संपादक दिलीप मंडल पत्रकारो पर सवालिया निशान लगाया है। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत में इस समय कोई भी पत्रकारिता नहीं कर रहा है। कुछ दलाली कर रहे हैं तो कुछ लोग विरोध के नाम पर लफ़्फ़ाज़ी और भाषणबाज़ी कर रहे हैं।

दिलीप मंडल ने कहा कि इस समय चूँकि मेरे पास रिपोर्टर और फ़ोटोग्राफ़र की टीम नहीं है, वरना राफ़ेल कंपनी से 30,000 करोड़ रुपए का ठेका लेने वाली रिलायंस डिफ़ेंस के उस प्लांट की तलाश करवाता जहाँ कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के मुताबिक़ हज़ारों युवाओं को नौकरी मिली है। कहाँ है वह प्लांट? ज़मीन अधिग्रहण हुआ या नहीं? बाउंड्री बनी या नहीं? कितने लोग काम करते हैं? कितना वेतन मिलता है? ये होगी असली पत्रकारिता। चार गेस्ट बुलाकर चपर-चपर करना पत्रकारिता नहीं है।

गौरतलब है फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने कहा है कि राफेल सौदे में अनिल अंबानी को दसाल्ट ने नहीं चुना था, और उनके पास कोई विकल्प ही नहीं था, हमने वही पार्टनर चुना जो हमें दिया गया. यह खुलासा किया है फ्रांस की न्यूज वेबसाइट मीडियापार्ट ने.


वेबसाइट के पत्रकार जूलियन बोसू ने एक ट्वीट में फ्रांस के राष्ट्रपति से हुए सवाल जवाब का जिक्र किया है. उन्होंने लिखा है कि जब उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति से पूछा कि राफेल डील में रिलायंस को पार्टनर बनाने का फैसला किसका था, तो उनका जवाब था कि, “रिलायंस को पार्टनर बनाने का फैसला दसाल्ट का नहीं था, हमने वही पार्टनर चुना जो हमें दिया गया.”

(साभार- नेशनल स्पीक)

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