बॉलीवुड के “बादशाह” शाहरुख़ ने हर किरदार को बनाया यादगार

October 29, 2017 by No Comments

शाहरुख़ ख़ान के जन्मदिन में यूँ तो अभी कुछ दिन बाक़ी हैं लेकिन उनके चाहने वाले सोशल मीडिया पर उनका जन्मदिन मनाने की तैयारी में लग गए हैं. कुछ लोग ट्विटर पर हैशटैग चला रहे हैं तो कुछ उनके निवास मन्नत के सामने भी जा कर अपने सुपरस्टार की एक झलक लेने की सोच रहे हैं. इसी को देखते हुए हम भी शाहरुख़ ख़ान के बारे में लगातार जानकारियाँ साझा कर रहे हैं और उनके बारे में बात कर रहे हैं.

जो लोग 90 के दशक में बड़े हुए हैं वो जानते हैं कि तब फ़िल्मों को लेकर लोग कितने संजीदा होते थे. छोटे शहरों में गली के मोड़ पर फ़िल्मों के पोस्टर लगे होते थे जिसे राहगीर एक बार ज़रूर देखते थे. छोटे पोस्टर अगर अच्छे लग जाएँ तो जिस सिनेमा हॉल में उस फ़िल्म के लगने की ख़बर होती थी वहाँ जाकर बड़े पोस्टर देखते थे. इसी दौर में शाहरुख़ की फ़िल्मों के पोस्टर्स को लेकर जो दीवानगी उस दशक में देखी गयी वो कमाल ही है. काजोल के साथ आयी उनकी मशहूर फ़िल्म दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे का वो पोस्टर जिसमें काजोल उनकी पीठ पर हैं और शाहरुख़ जैकेट और टोपी पहने उन्हें देखने की कोशिश कर रहे हैं, ये वो दौर था जब फ़िल्मों को सिर्फ़ फ़िल्म नहीं माना जाता था. इसी दौर में शाहरुख़ ख़ान का उदय है..एक ऐसा हीरो जो रोमांटिक तो है लेकिन फूहड़ नहीं है लेकिन ऐसा नहीं है कि वो सिर्फ़ रोमांटिक भूमिका में ही हिट हुए. उन्होंने अगर दिल तो पागल है और कुछ कुछ होता है जैसी फ़िल्में कीं वहीँ बाज़ीगर, डर जैसी फ़िल्मों में उनका किरदार अलग शेड का रहा. इसी तरह उनकी शालीन छवि वाली फ़िल्मों ने भी ख़ूब कामयाबी हासिल की. कभी हाँ कभी ना और माया मेमसाब जैसी फ़िल्मों में उनके द्वारा निभाये गए किरदार आज भी याद किये जाते हैं.

नए दौर में चीज़ें भी तेज़ी से बदलीं और हर बार जब कोई बदलाव आया तो लोगों ने कहा कि अब शाहरुख़ का दौर ख़त्म और किसी नए हीरो का शुरू. ये हम सभी को याद होगा कि जब हृतिक रौशन की पहली फ़िल्म कहो ना प्यार है रिलीज़ हुई तो कई आलोचकों ने कहा कि अब बॉलीवुड के बादशाह को बतौर हीरो काम करना बंद करना चाहिए क्यूंकि उनकी जगह हृतिक ने ले ली है.हालाँकि हृतिक ने अपनी एक मज़बूत जगह बनायी लेकिन शाहरुख़ की जगह कोई डिगा नहीं पाया. असल में इस दौर में शाहरुख़ की फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी, हे राम और बादशाह जैसी फ़िल्में आयीं जो टिकट खिड़की पर पिट गयीं. हालाँकि उनके काम की तारीफ़ सभी फ़िल्मों में हुई लेकिन दर्शकों को ये फ़िल्में तब ख़ास पसंद ना आयीं. बादशाह और फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी जैसी फ़िल्में हालाँकि टीवी पर ख़ूब देखी गयीं.

आलोचकों को ग़लत साबित करते हुए उनकी अमिताभ बच्चन के साथ मुहब्बतें फ़िल्म आयी.मुहब्बतें में शाहरुख़ द्वारा निभाये गए राज आर्यन मल्होत्रा के किरदार की आलोचकों और दर्शकों सभी ने सराहना की. हालत ये थी कि फ़िल्म में शाहरुख़ द्वारा पहना गया चश्मा भी फैशन बन गया. इसके बाद शाहरुख़ की कामयाबी का एक और दौर शुरू हुआ. इस दौर में उनकी देवदास, चलते चलते, वीर-ज़ारा, स्वदेस और मैं हूँ ना जैसी फ़िल्में आयीं. डॉन, ॐ शांति ॐ, कभी ख़ुशी कभी ग़म जैसी फ़िल्मों के ज़रिये उन्होंने कामयाबी का दौर जारी रखा. चक दे इंडिया और रब ने बना दी जोड़ी भी इसी दौर में आयीं.

52 साल की उम्र के नज़दीक पहुँच चुके शाहरुख़ अभी भी ऊंचे मक़ाम पर हैं. हालाँकि अब उनकी पिछली कुछ फ़िल्में उतनी कामयाब नहीं हो पा रही हैं लेकिन उनको लेकर अभी भी दर्शकों में ज़बरदस्त क्रेज़ है.

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *