बाबरी मस्जिद ही नहीं गिरी थी, उस दिन संविधान का भी ध्वंस किया गया था: शरद यादव

November 27, 2018 by No Comments

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आ रहे हैं धार्मिक उन्माद के मुद्दों को उठाने का काम चल रहा है. इस समय सबसे अधिक चर्चा अयोध्या मुद्दे की है. अयोध्या में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद का मुद्दा लगातार गर्मा रहा है. इसको लेकर अब जदयू के पूर्व नेता और लोकतान्त्रिक जनता दल के अध्यक्ष शरद यादव ने भाजपा और मोदी सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने सोमवार को एक बयान में कहा कि चुनाव से ठीक पहले मंदिर का मुद्दा उठाने का मक़सद देश को बाँटने की कोशिश है. वरिष्ठ समाजवादी नेता शरद यादव ने अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद की ‘धर्म संसद’ को लेकर सोमवार को भाजपा पर जमकर निशाना साधा.

उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले मंदिर का मुद्दा उठाया जाता है ताकि देश को बाँटा जा सके. शरद यादव ने कहा कि देश की उम्र बढ़ने के साथ लोकतांत्रिक मर्यादा का क्षरण हो रहा है जो बहुत चिंता की बात है. शरद यादव ने कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग की ओर से आयोजित संविधान दिवस समारोह में कहा,”अयोध्या में जो गिराया गया वो ढांचा नहीं गिराया था, बल्कि संविधान का ध्वंस किया गया था और संविधान की सारी मर्यादा को तोड़ा गया था. एक बार फिर से आस्था का विषय बताया जा रहा है.”

उन्होंने कहा,”बाबा साहेब का संविधान आस्था नहीं, वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाला है. इसके तहत संसद कभी बाहर नहीं लगती, लेकिन अब संसद बाहर लगाई जा रही है.हमारा संविधान साझा विरासत की बात करता है. यह विविधताओं वाला देश है. यहां अलग अलग जाति और धर्म के लोग रहते हैं. यह चिंता की बात है कि जैसे जैसे भारत की उम्र बढ़ रही है उसी तरह लोकतंत्र की मर्यादा लगातार कम हो रही है.” इससे पहले उन्होंने एक बयान में कहा,”आज देश में हालात ठीक नहीं है. सिर्फ हिन्दू-मुस्लिम करने के अलावा कुछ नहीं हो रहा है. मौजूदा शासन में देश कठिनाई के दौर से गुजर रहा है. आये दिन संविधान विरोधी ताकतें देश को बांटने और तोड़ने का काम कर रही है. सांप्रदायिक ताकतों द्वारा लोगों को गुमराह किया जा रहा है और धार्मिक उन्माद को बढ़ावा दिया जा रहा है.”

शरद यादव ने ये भी कहा,”मंदिर का मुद्दा सांप्रदायिक ताकतें तभी उठाती हैं जब चुनाव नजदीक होता है जिससे की समाज को वोट के लिए बांटा जा सके. इनका मकसद सिर्फ़ और सिर्फ देश को तोड़ना है और हमें इनसे सतर्क रहना चाहिए. धर्म के आधार पर भेदभाव और देश को नहींबांटा जाना चाहिए.” शरद यादव ने आगे कहा कि हमारा देश विविधता में एकता का देश है जहाँ हर धर्म और जाति के लोगों को समान अधिकार है और किसी भी प्रकार के विवाद को सुलझाने के लिए अदालतों का दरवाजा सब के लिए खुला है. अदालत के फैसले का हर किसी को सम्मान करना चाहिए तथा न्यायपालिका में विश्वास होना चाहिए.

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