शरीर के इन हिस्सों के बाल काटना ज़रूरी है,हज़रत अनस(र.अ.) ने फ़रमाया

March 16, 2019 by No Comments

हज़रत अनस रज़ी अल्लाहु ताला अनहु फरमाते हैं कि अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मूँछें कतरने और नाख़ुन काटने और बग़लों के बाल साफ़ करने और ज़ेर नाफ़ बाल साफ़ करने का हुक्म दिया,हमारे लिए अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम की जानिब से ये मुद्दत मुक़र्रर की गई कि हम इन बालों को चालीस दिन से ज़्यादा ना छोड़े रखें (यानी इन चीज़ों की सफ़ाई की ज़्यादा से ज़्यादा मुद्दत चालीस दिन है)
किताबों में आया है कि इन बालों के एक हफ्ते में साफ करना चाहिए,और अगर एक हफ्ते में साफ न कर पाये,तो पंदरह दिन के अंदर साफ करना चाहिए,चालीस दिन की मुद्दत आखिरी मुद्दत है,अगर चालीस दिन के बाद भी साफ नहीं करेगा,तो गुनाह मिलेगा,और इंसान के सेहत के लिए भी नुकसानदेह है,इसलिए चालीस दिन के अंदर इन बालों को ज़रूर साफ करना चाहिए।

ऊपर जो हदीस गुज़री है, उस से मालूम ये हुआ कि ज़ेर नाफ़ बालों की सफ़ाई की ज़्यादा से ज़्यादा मुद्दत चालीस दिन है,इस अर्से में ज़रूर सफ़ाई कर लेनी चाहिए,अब रही ये बात कि ज़ेर नाफ़ बाल कहाँ तक काटने चाहिए तो इस सिलसिले में याद रहे कि ज़ेर नाफ़ का लफ़्ज़ इशारा के तौर पर इस्तिमाल किया जाता है।
हदीस में ज़ेर नाफ़ बालों के लिए आना का लफ़्ज़ इस्तिमाल हुआ है जिसका अहल लुग़त ने तर्जुमा किया है.शर्मगाह के किनारे उगने वाले बाल मतलब ये हुआ कि कि नाफ़ के नीचे दाएं बाएं जो बाल हो नीज़ ख़ुसयतैन(अंडों)पर जो बाल हों।उस के इर्दगिर्द और इस के मुक़ाबिल रानों का वो हिस्सा जहां नजासत लगने का ख़तरा हो सबको साफ़ करना चाहिए।

नीज़ मक़अद के इर्दगिर्द के बालों को साफ़ करना चाहिए, बल्कि कुछ उलमा ने मक़अद के इर्दगिर्द बालों के बारे में ज़्यादा ताकीद की है।पाखाना पेशाब करने के रास्ते के आस पास मौजूद तमाम बालों का साफ करना ज़रूरी है ताकि सफ़ाई बरक़रार रख सके,फतावा आलमगीर में यही लिखा है।(आलमगीरी,जिल्द नंबर 5 पेज नंबर 358)
दोस्तों जेरे नाफ़ बाल के लिए हदीस में “आना” का लफ़्ज़ इस्तिमाल हुआ है,यह अरबी लफ्ज है,जिसका अहल लुग़त ने तर्जुमा किया है”औरत की शर्मगाह के किनारे उगने वाले बाल।”आना” दर असल इस हड्डी को कहते हैं जिस पर ये बाल उगते हैं.लिहाज़ा ज़ेर नाफ़ बालों को काटने की हद यही है कि सिर्फ उस जगह के बाल काटे जाएं जहां उमूमन औरतों के भी बाल होते हैं।इस से तजावुज़ ना करें।
औरत का नाम इस मसला में इस वजह से लिया जाता है कि मर्द के तो उमूमन तमाम बदन पर ही बाल होते हैं जबकि औरत के सिर्फ इस मख़सूस हिस्सा पर ही बाल होते हैं,इसी वजह से औरत की मिसाल दी गई है। जब आप बाल काटने लगें,तो आप अपने पेट के निचले हिस्सा को दबा कर देखें तो एक हड्डी महसूस होगी.बस जहां से इस हड्डी का आग़ाज़ होता है वहीं से बाल काटने की शुरुआत करें,क्योंकि यही हड्डी आना कहलाती है और इस पर उगने वाले बालों को भी आना कह देते हैं।

PROPHET MUHAMMAD


ज़ेर नाफ़ (आना के) बालों को हलक़ करने (मूंडने) का हुक्म है।और ये काम उस्तरे या सेफ़्टी से ही होता है।इस मक़सद के लिए इस्तिमाल होने वाली क्रीमें,पाउडर और स्प्रे बालों को मूंडते नहीं बल्कि उन्हें कमज़ोर कर के तोड़ते हैं.जबकि शरीयत का मतलूब उन्हें मूंडना है।इसी तरह बग़लों के बालों को शरीयत ने उखेड़ने का हुक्म दिया है.
लिहाज़ा उन्हें खींच कर जड़ से उखेड़ा जाये।मूंडने काटने या तोड़ने से मक़सद शरीयत पूरा नहीं होता।इसी तरह कुछ लोग रानों के बाल भी मूंडते हैं जबकि “आना” शर्मगाह पर उगने वाले बाल और पेट्रो की हड्डी के बाल हैं।रानें ना तो शर्मगाह हैं और ना ही पेड़ू की हड्डी।इस लिए रान के बाल नहीं काटना चाहिए,बल्कि उन्हें उसकी हालत पर रहने दिया जाये।

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