'शुरू शुरू में कारोबार खूब चला लेकिन फिर थप हो गया'..जानिए क्या होती है इसकी वज़ह ?

March 25, 2019 by No Comments

क़ुरान-ए-पाक और हदीस मुबारका के ज़रीये अल्लाह ताला ने ख़ैर की हर बात अपने बंदों को वाज़िह तौर पर बता दी और हर वो चीज़ जिसमें नुक़्सान है,इस पर भी मुतनब्बा कर दिया।फरमाने रसूल की रोशनी में बरकत का मफ़हूम ये है कि वो थोड़ा सा माल जो इन्सान के गुज़ारे के लिए काफ़ी हो,वो बेहतर है इस माल से जो ज़्यादा हो लेकिन इन्सान को ग़फ़लत में डाल दे।
इसी तरह वो बंदा कामयाब हो गया जो मुसलमान बन कर ज़िंदगी बसर करता है।अल्लाह ने जो माल अता किया और इस पर क़नाअत भी नसीब फ़र्मा दी,तो ये बंदा कामयाब है।आज के दौर में देखा जाता है कि हर इंसान माल के और दौलत के पीछे भाग रहा है और हलाल हराम की तमीज़ नहीं कर रहा है,हर इंसान चाहता है कि उसके कारोबार में बहुत ज़्यादा बरकत हो,और वह मालदार हो जाये,लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि ज़्यादातर लोगों को माल और दौलत नसीब नहीं होती है,और जो लोग कारोबार करते हैं,उनके कारोबार में बरकत भी नहीं होती है।

ख़ैर व बरकत ख़त्म करने वाली बुनियादी चीज़ इन्सान के गुनाह हैं।जहां गुनाह होते हैं वहां से ख़ैर व बरकत उठ जाती है।अल्लाह ताला का फ़रमान है: बर ज़मीन और समनदर में जो फ़साद आया है,इस की वजह तुम्हारे करतूत हैं।इन्सान की बद आमालीयों की वजह से जब फ़साद आएगा तो ख़ैर व बरकत ख़त्म हो जाएगी।दुनिया में फ़साद पर सज़ा इसलिए हैं कि शायद इन्सान वापिस लौट आए,तौबा कर ले।
बला-शुबा अल्लाह ताला बड़ा बख़शने वाला है,अगर हमारे गुनाहों की वजह से हमें पकड़ता,तो फ़ौरी हम पर अज़ाब नाज़िल कर देता, ये अल्लाह हमें मोहलत देता है।इस ज़िमन में अल्लाह का फ़रमान है।तर्जुमा:अगर इन्सान को इस के गुनाहों की वजह से सज़ा देता तो ज़मीन पर एक चौपाया भी ज़िंदा ना रहता।

बरकत ख़त्म होने की दूसरी वजह कारोबार में धोका देना है।गाड़ी बेचनी हो तो असल बात नहीं बताते,कोई सौदा किया जाये तो अक्सर ग़लत बयानी करते हैं।नतीजे के तौर पर उनकी तिजारत में से अल्लाह ताला बरकत छीन लेता है। पैसे ज़्यादा भी मिल गए तो इस में बरकत नहीं होगी।तीसरी चीज़ झूट बोलने के साथ झूटी क़सम खाना है।
इसी तरह इन्सान किसी कमतर चीज़ का सदक़ा करे,तो ना उस बंदे को बरकत मिलेगी और ना ही उस के माल में बरकत होगी।आज हम इस्तिमाल शूदा और नाकारा चीज़ों का सदक़ा करते हैं।कोई चीज़ पुरानी हो जाये तो इस का सदक़ा करते हैं।इसी तरह बारिश भी अल्लाह की तरफ़ से बरकत है। लोग जब अपने माल की ज़कात देना बंद कर देंगे,तो अल्लाह ताला आसमानों से रहमतें, बरकतें और बारिश नाज़िल करना बंद कर देगा।
एक बड़ी वजह नाप तौल में कमी करना भी है।इस गुनाह के मुर्तक़िब अफ़राद भी बरकत से महरूम रहते हैं।तराज़ू में डंडी मारी जाएगी,तो अख़राजात में सख़्ती आजाएगी।हुकमरानों के ज़ुलम बर्दाश्त करना पड़ेंगे।क़हत जैसी ज़िल्लत आजाएगी।कम तौलने वालों पर कमाई में शिद्दत आ जाएगी।कमाने में परेशानी आजाएगी।

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