लेबनान क्राइसिस: क्या ईरान और सऊदी अरब टकराव के रास्ते पर हैं?

पश्चिम एशिया के दो देश ईरान और सऊदी अरब आजकल जिस तरह से एक दूसरे के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी कर रहे हैं उससे ये लगता है कि दोनों क्षेत्रीय शक्तियां टकराव के रास्ते पर है. असल में इस टकराव की वजह है लेबनान. लेबनान के प्रधानमंत्री साद अल हरीरी ने अचानक ही सऊदी अरब की राजधानी में इस्तीफे का एलान कर दिया. अब ये बात किसी के समझ में नहीं आयी कि हरीरी ने आख़िर सऊदी अरब की राजधानी में इस्तीफ़ा क्यूँ दिया. हरीरी ने इसको लेकर कहा है कि हिज़बुल्लाह देश की मशीनरी पर क़ब्ज़ा करने की कोशिश में है और ऐसे में उन पर ख़तरा है.

हिज़बुल्लाह ने इसको लेकर सऊदी अरब पर आरोप लगाया है कि सऊदी अरब की सरकार ने इस्तीफ़ा दिलवाया. लेबनान के नेता मानते हैं कि हरीरी को सऊदी अरब ने नज़रबंद कर लिया है. सऊदी अरब इस पूरे मामले की जड़ ईरान को बता रहा है. हिज़बुल्लाह को ईरान का क़रीबी माना जाता है ऐसे में सऊदी अरब का कहना है कि पीछे के दरवाज़े से ईरान लेबनान में सरकार चलाना चाहता है.

इस बीच स्थिति इस क़दर ख़राब हो गयी है कि बहरीन और सऊदी अरब दोनों ने ही वहाँ से अपने नागरिक बुला लिए हैं और कहा है कि कोई भी लेबनान ना जाए. हिज़बुल्लाह क्षेत्र का ताक़तवर संघठन है और ये मानता है कि इलाक़े में अशांति के लिए कहीं ना कहीं सऊदी अरब ज़िम्मेदार है.इसमें एक बात और समझने की है साद अल हरीरी के पिता रफ़ीक़ अल हरीरी की हत्या भी कथित तौर पर हिज़बुल्लाह ने करायी थी.

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