छोटे दुकानदारों पर आघात करता “चीनी झालरों” के बहिष्कार का नारा

October 15, 2017 by No Comments

दिवाली आ गयी है और एक बार फिर चीनी झालरों का विरोध शुरू हो गया है. ये विरोध पिछली बार से कहीं ज़्यादा है लेकिन अभी भी ये सिवाय सांकेतिक नारों से आगे नहीं बढ़ पाया है. हमने भी इस बारे में पड़ताल करने की कोशिश की. इस बारे में कुछ लोगों से बात भी की.

लखनऊ के बाज़ारों का दौरा करने के बाद एक और बात ज़हन में आयी है. वो ये है कि असल में विरोध चीनी झालरों या चीनी सामान का नहीं विरोध कहीं ना कहीं छोटे दुकानदारों का हो रहा है. ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ क्यूंकि अगर बाज़ार में हम जाएँ तो ये झालरें बेचने वाले दुकानदार कोई बहुत बड़े व्यापारी नहीं होते, ये छोटे व्यापारी हैं जो त्योहारों के मौक़े पर कुछ ज़्यादा पैसे कमा पाते हैं. सिर्फ़ छोटे दुकानदारों की भी बात नहीं है इसमें उन लोगों की भी बात है जो अमीर लोगों की तरह दिवाली मनाना चाहते हैं. हर इंसान चाहे वो ग़रीब हो या अमीर त्यौहार को अच्छी तरह से मनाना चाहता है. आप सोचिये चीनी झालरें 20 रूपये की दस मीटर मिल जाती हैं तो उसे ख़रीदने वाले अधिकतर कौन होंगे? अभी बहुत साल तो नहीं बीते कि हम ये भूल गए हों कि दिवाली पर लोग झालरें किराए पर लाते थे और उसके लिए भी एक संघर्ष. जो लोग चीनी झालरों का विरोध कर रहे हैं क्या वो ये कहना चाहते हैं कि लोग दिवाली में भी मन-मर्ज़ी की ख़ुशियाँ ना मना पायें. देश के मशहूर त्योहारों में से एक त्यौहार का क्या ये अप्रत्यक्ष रूप से विरोध नहीं है?

और कौन हैं ये लोग जो चीनी सामान का बहिष्कार करते हैं? जिस माइक से ये अपना एलान करते हैं वो भी चीनी है और जिस काग़ज़ पर ये बात लिख कर छपवाते हैं वो भी चीनी ही है. अगर आप इनसे इस बारे में सवाल करेंगे तो कहेंगे कि ये उन्हें सस्ता पड़ता है. आपके लिए सस्ता पड़े तो ठीक है दूसरे के लिए सस्ता पड़े तो “देशद्रोही”. क्या ही लॉजिक है. एक और बड़ी दिलचस्प बात ये है कि चीनी सामान का विरोध करने के लिए जो मास्क इस्तेमाल में आता है वो भी चीन ही में बनता है. बात करते हैं चीनी सामान के बहिष्कार की और वो भी करते हैं चीन में ही बने सामान से.

देश में लोकतंत्र है और इसमें कोई दो राय नहीं है कि चीन के रवैये से देशवासियों में ग़ुस्से की भावना आ जाती है और लोग चीनी सामान के बहिष्कार की बात करते हैं. चीनी सामान के बहिष्कार की जो मुहिम लोग चला रहे हैं वो तभी किसी तरह से कामयाब हो सकती है जब आप ख़ुद चीनी सामान का त्याग करें. क्या आप ऐसा कर पायेंगे? मुझे लगता है ये तभी मुमकिन है जब हम चीनी रेट से कम पर अपने सामन को बेच पायें. चलिए कम ना सही, कम से कम बराबर पर ही बेच पायें. और अगर हम वाक़ई कम पैसे में सामान बना पायेंगे तो भारत ही नहीं दुनिया के दूसरे देशों में भी अपना सामान बेच पायेंगे. चीन के सामान की गुणवत्ता पर भले ही सवाल उठते हों लेकिन सच यही है कि चीनी सामान बिकता है. और बिके भी क्यूँ ना.. आप सोचिये एक इयर फ़ोन किसी विशेष कंपनी का लो तो 200 से कम का नहीं आता और बढ़ते बढ़ते हज़ारों में चला जाता है जबकि वहीँ चीनी इयर फ़ोन 15-20 रूपये का मिल जाता है. गुणवत्ता की कमी अपनी जगह है लेकिन सिर्फ़ इसी वजह से एक भारतीय रिक्शे वाला संगीत सुन पाता है. बहरहाल..मैं यही कहूँगा कि जिस दिन देसी सामान चीनी सामान से सस्ता मिलने लगेगा अपने आप चीन का सामान बिकना बंद हो जायेगा.

अरग़वान रब्बही

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