“तब क्यों नही बोली…अब क्यों?”- ये सवाल आपको ख़ुद पर आज़माना चाहिए

October 7, 2018 by No Comments

दस साल पहले क्यों नहीं बोली अब क्यों बोली?..फ़्लाइट में कोई छेड़ता रहा वहाँ क्यों नहीं बोली, उतरकर सोशल मीडिया live क्यों की?..रास्ते में कोई छू गया तो घर आकर क्यों बोली, रास्ते में क्यों नहीं बोली?..घर में आने वाला रिश्तेदार बचपन भर तंग करता रहा तब क्यों नहीं बोली, बड़ी होकर क्यों बोली?..सोशल मीडिया में मिला कोई भावना से खेलता रहा तब क्यों नहीं बोली, बाद में क्यों बोली?…

तब क्यों नहीं बोली..अब क्यों बोली???…बहुत सही सवाल है…लड़कियों को वहीं के वहीं बोलना चाहिए तुरंत…कुछ लड़कियाँ तब ही बोल देती हैं, बिलकुल वहीं के वहीं…झन्नाटेदार झापड़ मार देती हैं वहीं के वहीं..पुलिस स्टेशन चली जाती हैं..उनको आपका सपोर्ट मिल जाता होगा ना??..क्या उनके लिए आप कहते हैं कि ये है असली बहादुर लड़की..तुरंत बोली हम इसके साथ हैं। ऐसा कहते हैं आप या उसको भी “चालू, अपने फ़ायदे के लिए किसी के भी साथ चली जाने वाली, बात का बतंगड़ बनाने वाली, पब्लिसिटी पाने के लिए कुछ भी करने वाली, वेश्या आदि उपाधियों से ही नवाज़ते हैं??

हर लड़की चाहती है कि उसको तभी के तभी न्याय मिले…वो उसी वक़्त अपने शरीर और भावना से खिलवाड़ करने वाले उस क़रीबी रिश्तेदार, दोस्त, कलीग, साथ चल रहे अनजान यात्री को जवाब देना चाहती है…उसे इस बदतमीज़ी के लिए सज़ा देना और दिलवाना चाहती है। पर अक्सर चुप रहती है…अपने तक रखती है क्योंकि कहीं न कहीं वो जानती है समाज किस तरह का है।

बोलने से पहले ये जो वक़्त वो लेती है न; एक पल…दो दिन..दो महीने…दस साल…पूरा जीवन…वो बस और बस ख़ुद पर विश्वास जुटाने का वक़्त होता है।उन्हें पता है आपकी ओर से हर स्थिति में यही सवाल आएगा…अब क्यों?…चाहे वो “अब” उसी समय आए या सालों बाद।

आप उसे उन्हीं उपाधियों से नवाज़ेंगे जिनसे तुरंत कहने पर नवाज़ते हैं…इस मामले में आप ये नहीं सोचते कि अब क्यों??..कोई भी लड़की जो वक़्त लेती है वो ख़ुद को इन सारे सवालों को झेलने और अपने लिए खड़े रहने का साहस जुटाने के लिए लेती है..ये किसी के लिए एक पल का हो सकता है..किसी के लिए सालों बाद का..तो किसी के लिए मरते दम तक न आए।

दरअसल ये अभी क्यों बोली? तभी क्यों बोली?..आज क्यों बोली?..जैसे सवालों में समय की इकाई बदलती जाएगी..एक बात जो चलती रहेगी वो ये कि _______”क्यों बोली???”

अगली बार अपना ये सवाल “तब क्यों नही बोली…अब क्यों?” ख़ुद पर आज़माइएगा…तब भी समाज अपने ख़िलाफ़ हुए शोषण पर चुप्पी साधने वाली लड़की को बेहतर मानता आया था और अब भी…क्यों?..क्या हम अब तक समाज को इस लायक नहीं बना सके कि हम किसी शोषित की पीड़ा को पहले ही शब्द में जज किए बिना सुन सकें?..क्या हम अपने शोषण के ख़िलाफ़ बोलने वाली लड़की को वेश्या ही क़रार देते रहेंगे??…या हम अपनी इस घटिया मानसिकता से कभी उबरेंगे और सोचेंगे कि तब की बात जो थी सो थी..हम समाज को स्त्रियों के लिए सुरक्षित नहीं बना सके अब तक…क्यों? सवाल सही जगह उठाइए… #अब_क्यों_नहीं

(नेहा शर्मा)

दिमाग़ी फ़ितूर की लेखिका नेहा शर्मा

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