आख़िर पक्का हो गया सपा-बसपा गठबंधन

October 28, 2018 by No Comments

लोकसभा चुनाव में भाजपा का रथ रोकने के लिए उत्तर प्रदेश में हाथ मिलाने वाली समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भी साथ हो सकती है।लोकसभा चुनाव से पहले मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते दिख रहे हैं. इन चुनावों में उत्तर प्रदेश के दो कद्दावर दलों समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के करीब आने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई है.

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में बसपा के साथ गठबंधन कर चुनावी ताल ठोकने की तैयारी कर रही कांग्रेस को मायावती ने करारा झटका दे दिया है। माना जा रहा है कि मायावती-अखिलेश के बीच इस चुनाव में गठबंधन देखने को मिल सकता है.सूत्रों के अनुसार इस गठबंधन में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी भी शामिल हो सकती है. जानकारी के अनुसार गठबंधन को लेकर सहमति तो बनती दिख रही है लेकिन सीटों के बंटवारे पर पेंच फंसा है. गोंडवाना गणतंत्र पार्टी यूपी की दोनों ही पार्टियों को ज्यादा सीट नहीं दे रही है. लिहाजा अभी चर्चा चल रही है.

सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने काफी इंतजार कराया. हम मध्य प्रदेश में अकेले या फिर गोंडवाना पार्टी या बसपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे. अखिलेश यादव लखनऊ में समाजवादी पार्टी कार्यालय में वरिष्ठ शिक्षकों के सम्मेलन में बोल रहे थे.अखिलेश यादव ने कहा कि हम मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ मैदान में उतरने की तैयारी में थे. कांग्रेस अभी तक अपनी कोई योजना पर हमसे बात नहीं कर रही है. हमने बहुत इंतजार किया है, लेकिन अब नहीं करेंगे. 

बीएसपी सुप्रीमो के कांग्रेस के साथ गठबंधन न करने के इस ऐलान पर प्रतिक्रिया देते हुए कमलनाथ ने कहा था कि वह इसे कांग्रेस के लिए झटका नहीं मानते हैं। कमलनाथ ने कहा, ‘राज्य में अकेले विधानसभा चुनाव लड़ने का बीएसपी का निर्णय कोई झटका नहीं है और पार्टी को पूरा भरोसा है कि जमीनी समर्थन का आधार मजबूत है।’ कमलनाथ ने कहा कि बीएसपी गठबंधन के लिए जो सीटें हमसे चाहती थी हम उन्हें नहीं दे सकते थे। उन्होंने कहा, ‘बीएसपी ने जो सूची सौंपी थी, उन सीटों पर उनकी जीत संभव नहीं थी और जिन सीटों पर जीत होती, उनका नाम नहीं सूची में शामिल नहीं था।’

बता दें बीएसपी सुप्रीमो मायवती और सपा सुपसुप्रीमो अखिलेश यादव साफ तौर पर कांग्रेस से किसी प्रकार के गठबंधन की गुंजाइश को ही खत्म कर चुकी हैं. दोनों पार्टियों के लिए ये चुनाव जीत से ज्यादा अपनी पार्टी का जनाधार यूपी से बाहर बढ़ाने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है. वहीं दोनों पार्टियों की कांग्रेस से तल्खी का असर लोकसभा चुनाव में यूपी की राजनीति पर भी पड़ने की उम्मीद की जा रही है.

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