कहानी कोना:  ‘डॉक्टर कबाड़ी’ भाग-1

March 3, 2018 by No Comments

                                                                                   ‘डॉक्टर कबाड़ी’

राजस्थान के एक गाँव में एक टेलर अपनी पत्नी मीरा और अपने बेटे गुटू के साथ रहता है। टेलर पुरषों के कपड़े सिलता है। गुटू गाँव के स्कूल में छोटी क्लास में पढता है। गाँव के लगभग बच्चे वहीँ पढ़ते हैं और जिन परिवार के पास ज्यादा पैसे हैं, वह अपने बच्चों शहर के स्कूलों में पढ़ने के लिए भेजते हैं। गुटू की स्कूल के सभी बच्चो के साथ अच्छी दोस्ती हैं, लेकिन एक मंटू नाम का लड़का, जो गुटू के घर के पास ही रहता है। उससे गुटू की ज्यादा दोस्ती है। गुटू का स्कूल उसके पिता जी की दुकान के पास ही है।
टेलर गुटू और मंटू को साइकिल पर बैठा कर स्कूल छोड़ता और अपनी दूकान में चला जाता। जोकि गाँव के छोटे से, लेकिन बाज़ार में ही है।
वहां पर वह लोगों के कपड़े सिलता और स्कूल की छुट्टी के बाद वह गुटू और मंटू को स्कूल से वापिस घर ले आता।
यह रोज़ का सिलसला है, स्कूल से वापिस आकर गुटू और मंटू इक्क्ठे बैठ कर स्कूल का काम करते।
छोटी क्लास में गुटू और मंटू काफी दिल लगाकर पढाई करते। बाद में सारे बच्चे इक्क्ठे होकर कभी क्रिकेट और लुक्का-छुप्पी खेला करते।
टेलर नहा- धोकर जल्दी उठ जाता। लेकिन गुटू नहीं उठा, उसे उठाने के लिए काफी आवाज़ें मारनी पड़ती, जबकि मंटू उसे स्कूल ले जाने के लिए भी आ जाता।
टेलर: मीरा मैं चला नहाने, गुटू को भी जल्दी तैयार कर दो।
मीरा: हाँ ठीक है, आप जल्दी बाहर आ जाना।
माँ: बेटा, गुटू जल्दी उठो, स्कूल भी जाना है। तुम लेट हुए तो तुम्हारे पिता जी गुस्सा करेंगे।
गुटू: उठा गया माँ, मुझे भी बाथरूम जाना है, पेट में प्रेशर बना हुआ है।
माँ: रुक जा एक मिंट, तेरे पिता जी बाहर आते हैं तो तुम चले जाना।
मीरा: सुनो
टेलर: हाँ, कहो
मीरा: जल्दी बाहर आओ, गुटू को भी पेट में प्रेशर बना हुआ है।
पति: अभी आया, इसको कहो ज़रा रोक कर रखे।
टेलर मस्ती में नहा रहा है, पानी शरीर पर डाले जा रहा है, साथ में गंगा, जमुना, सरस्वती, हर-हर गंगे बोल रहा है।
गुटू: माँ, मुझे जोर से आई हुई है।
माँ: क्या करूँ, तेरे पिता जी बाहर आएं, तब न।
टेलर तौलिया लपेट कर बाथरूम से बाहर आता है, और हर-हर गंगे बोल रहा होता है।
इतने में मीरा कहती है, सुनो ये अपने मंत्र-शंत्र बाहर आकर पढ़ लिया करो।
गुटू को भी बाथरूम चाहिए होता है।
गुटू स्कूल के लिए तैयार होता है और मंटू भी अपने घर से आ जाता है।
टेलर गुटू और मंटू को अपनी साइकिल पर बिठा कर स्कूल छोड़, अपनी दूकान पर चला जाता है।
गुटू की क्लास अब बड़ी हो गई है, उसका मन अब पढाई में कम लगता है। लेकिन मंटू मन लगाकर पढ़ाई कर रहा है।
टेलर: मीरा-मीरा
मीरा: हाँ, आती हूँ, कुछ खाने के लिए ले आऊं ?
टेलर: खाने के लिए कुछ नहीं चाहिए, पता है आज स्कूल में गुटू के टीचर शिकायत कर रहे हैं कि गुटू अब पढाई पर ध्यान नहीं देता।
यही हाल रहा तो बड़ी क्लास में पास नहीं होगा।
मीरा: मैं समझाती हूँ उसे, आप नाराज़ मत होईये, पढाई नहीं करेगा तो मुश्किल हो जायेगी।
टेलर: हाँ, अब दूकान में भी इतनी आमदन नहीं है, लोग अब शहर के रेडीमेड कपड़े पहनने लगे हैं।
मीरा: जैसे-तैसे घर का खर्च चला हुआ है, गुटू अच्छे से पढाई कर नौकरी कर लेगा तो घर का हाल भी ठीक हो जाएगा।

गुटू, अब बड़ा हो गया है, गाँव के अन्य बच्चों के साथ खुद ही पैदल चलकर स्कूल जाता है, बच्चों से हंसी-मज़ाक करना, खेलना कूदना, वह अपने गाँव के बच्चों का चहेता बन गया है।
लेकिन स्कूल में अब वह अच्छे से पढाई नहीं करता, सभी टीचर गुटू को ढंग से पढाई करने के लिए कहते हैं, लेकिन गुटू उनकी बात को गंभीरता से नहीं लेता।

माँ: बेटा तुम ढंग से पढाई कर लो, आगे घर तुम्हे से संभालना है, तुम्हारे पिता जी कब तक अकेले बोझा ढोते रहेंगे। अब दूकान का काम भी कम हो गया है, लोग अब रेडीमेड कपड़े पहनने शुरू कर दिए हैं।
तेरे साथ वाले लड़के पढ़ने में कितने लायक हैं।

टेलर: मीरा, मैं चलता हूँ दूकान पर, इस गधे को कहना टाइम से चला जाए स्कूल।
मीरा: ठीक है।
माँ: गुटू उठो बेटा, जल्दी से तैयार हो, स्कूल जाओ।
गुटू: माँ, मुझे नहीं जाना आज स्कूल।
माँ: क्यों नहीं जाओगे।
गुटू: बस नहीं जाना मुझे।
उधर से मंटू भी गुटू को आवाज़ें लगाने आ जाता है।
मंटू: गुटू चल आजा यार, चले स्कूल।
गुटू: नहीं यार आज नहीं जाऊंगा।
मंटू: क्या हुआ तुझे, ख्युं नहीं जाएगा ?
गुटू: आज मैंने होमवर्क नहीं किया।
मंटू: बस इतनी सी बात, ला मैं तेरा होमवर्क कर देता हूँ।
गुटू: नहीं यार तुम जाओ।
मंटू चला जाता है।

टेलर: मीरा, कहाँ हो ? ये गधा स्कूल क्यों नहीं गया आज ? इसका टीचर दूकान पर आया था। बता रहा था कि आज वो स्कूल नहीं गया।

मीरा: मैं क्या करूँ ? मैंने कहा था, मुझे कहता नहीं जाना स्कूल, मुझे तो चिंता सत्ता रही है।

टेलर: मुझे इसकी चिंता लगी रहती है, पढ़ेगा नहीं तो काम-धंधा कैसे करेगा और मेरी सेहत ठीक नहीं है। मेरा पेट दर्द हो रहा है।
मीरा: तो आप एक दिन दूकान बंद करके शहर से दवा ले आओ।
गुटू कभी स्कूल जाता है, कभी नहीं। गाँव के लड़कों के साथ खेलता रहता है, या घर पर सोता रहता है।

मंटू: गुटू यार अब बोर्ड की क्लास की पढ़ाई है, हम दोनों बैठ कर खूब मेहनत करेंगे।
गुटू: यार, मैं पढाई कैसे करूँ? मेरा पढाई में मन नहीं लगता।
मंटू: तो तुम कहते थे मैं बड़ा आदमी बनूँगा।
गुटू: पता नहीं, पर तू कहता है तो तू मेरे घर आ जाया कर , इक्क्ठे बैठ कर पढ़ लिया करेंगे।

मंटू: ठीक है, ये हुई न बात।

टेलर घर आते ही मीरा को आवाज़ें मारता है।
मीरा: हाँ जी, क्या हुआ ? घर जल्दी आ गए ?
टेलर: मुझे एक चाय बना दो, मेरे पेट में दर्द हो रहा है।
मीरा: मैं आपसे उस दिन भी कहा था की शहर जाकर दवाई ले आओ।
टेलर: आज दूकान में मुझे थोड़ा काम था, काल जाता हूँ अब।
मीरा: गुटू आज फिर स्कूल नहीं गया।
टेलर को गुटू पर गुस्सा आता है। क्यों नहीं गया, कहाँ है ये गधे का बच्चा ?
मीरा: भीतर ही है।
टेलर: बुलाओ तो ज़रा इसको।
मीरा: गुटू, ओ- गुटू कहाँ है ? तेरे पिता जी तुझे बुला रहे हैं..
गुटू: हाँ, पिता जी ?

मीरा: भीतर ही है।

टेलर: बुलाओ तो ज़रा इसको।

मीरा: गुटू, ओ- गुटू कहाँ है ? तेरे पिता जी तुझे बुला रहे हैं..

गुटू: हाँ, पिता जी ?

पिता: तुम आज फिर स्कूल नहीं गए ? अगर नहीं पढ़ना आगे तो मेरे साथ दुकान पर चलकर काम सीखना शुरू कर। नहीं तो आगे जाकर तुझे रोटी के लाले पड़ जाएंगे।

गुटू: ठीक है पिता जी, मैं कल जाऊंगा स्कूल। इतना कहकर गुटू वहां से बाहर आ जाता है।

कहानी: डॉक्टर कबाड़ी
कहानीकार: संतोष कुमारी

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