अमरीकी हरकतों की वजह से मंदी झेल रहा है ये मुस्लिम देश..

October 2, 2018 by No Comments

नई दिल्ली…महज़ दस पहले जिस देश को मुस्लिम जगत में आर्थिक शक्ति माना जाता था अब वो बर्बादी की कगार पर है.सबसे आश्चर्य की बात है इस देश के पास तेल की संपदा बहुत अधिक है लेकिन विदेश नीति के वज़ह से इस देश को विश्व की शक्ति के बैन के वज़ह से गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है.इन सब के वज़ह से इस देश में जनता में आक्रोश है लेकिन इसके बाद भी इस देश ने किसी के आगे घुटने टेकने से इंकार कर दिया है.

हम जिस देश की बात कर रहे है वो इरान है अमेरिका द्वारा प्रतिबंध लगने से पहले ही ईरान पर बुरा असर दिख रहा है.यहाँ डॉलर के मुकाबले ईरानी मुद्रा रियाल की कीमत एक लाख रुपये से भी नीचे गिर गई है.ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों का पहला चरण सात अगस्त से शुरू होना है.एक फॉरेन एक्सचेंज वेबसाइट के मुताबिक, डॉलर की तुलना में रियाल की कीमत तेजी से गिरी है.

रविवार को एक डॉलर 1,11,500 रियाल के बराबर हो गया.शनिवार को यह 97,500 रियाल के स्तर पर था.कुछ अन्य मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार को डॉलर का एक्सचेंज मूल्य 1,08,500 से 1,16,000 रियाल के बीच रहा था.कमजोर अर्थव्यवस्था, वित्तीय दिक्कतों और अमेरिकी प्रतिबंध के दुष्प्रभाव से बचने के लिए डॉलर की बढ़ी मांग के चलते रियाल में गिरावट आई है.


जानकारी के बता दें कि बीते हफ्ते राष्ट्रपति हसन रूहानी ने केंद्रीय बैंक के चीफ को बदल दिया था.इसका मुख्य कारण संकट से निपटने में असफलता को बताया जा रहा है.हलाकि अभी तक इरान की इकॉनमी पटरी पर नही लौटी है.

परमाणु कार्यक्रमों पर नियंत्रण की शर्त के साथ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटाने के लिए 2015 में ईरान के साथ अमेरिका और अन्य देशों ने समझौता किया था. इस साल मई में अमेरिका ने खुद को इस समझौते से बाहर करते हुए पुन: प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी.अमेरिका ने विभिन्न देशों को चेतावनी दी है कि वे चार नवंबर से ईरान से तेल आयात बंद कर दें, अन्यथा उन्हें भी अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा.इस वज़ह से इरान की इकॉनमी गिरती जा रही है.पिछले दिनों आर्थिक संकट के वज़ह से जनता सडको पर आ गयी थी जिसको रोकने में इरानी सरकार को काफी मुश्किल हुई थी.

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