मुश्किल परिस्थिति में भारत के साथ खड़ा है ये मुस्लिम देश

October 7, 2018 by No Comments

दिल्‍ली: भारत की गणना विश्व के सबसे ज़्यादा कच्चा तेल आयात करने वाले देशों में होती हैं।भारत का सबसे ज़्यादा आयात पश्चिम एशिया के देशों से करता है ।इसके अलावा कॉन्गो गणराज्य, अंगोला, ब्राजील जैसे देश भी भारत को कच्‍चे तेल की आपूर्ति करते हैं। लेकिन भारत इस सभी देशों को भुगतान डालर मे करता है।जो भारत के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में रुपया डॉलर के मुकाबले मे लगातार कमज़ोर हो रहा है । इसका असर पेट्रोल डीज़ल और रसोई गैस की बढ़ती क़ीमतों में भी नज़र आ रहा है ।

इससे निपटने का एक उपाय डालर के बजाय रूपये में भुगतान हो सकता है। इसके लिए ईरान के साथ समझोता भी हो गया है । सूत्रों के मुताबिक सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने हाल में ईरान से 12.5 लाख टन कच्चे तेल के आयात का सौदा किया है जिसका भुगतान रु में किया जाएगा। सूत्रों ने कहा कि भारत और ईरान 4 नवंबर के बाद रुपये में व्यापार पर चर्चा कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि 4 नवंबर से ही ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध भी लागू हो जाएंगे। ऐसे मे ईरान के लिए अच्छी ख़बर यह है कि भारत जैसा बड़े आयातक के साथ उसके व्यापार संबंध बने रहेंगे।

हालांकि कुछ जानकारो का कहना है कि ईरान तेल के लिए भी रुपये मे भुगतान लेता रहा है। ईरान रुपए का उपयोग भारत से औषधि और दूसरी ज़रूरी चीजों के आयात के लिए करता है । दोनों ही देश इस प्रकार की व्यवस्था को और मज़बूत बनाना चाहते हैं। यह व्यवस्था दोनों देशों के हित में है।

सूत्रों के अनुसार इंडियन ऑयल ,और मैंगलोर रिफायनरी जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल रिफाइनरी कंपनियां तेल आयात के लिए ईरान को भुगतान को लेकर यूको बैंक या आईडीबीआई बैंक का उपयोग कर सकती हैं । भारत ने जहाँ पिछले साल ईरान से करीब 2.25 करोड़ टन कच्चे तेल का आयात किया था वहीं इस साल 2.5 करोड़ टन तेल आयात करने की योजना है। उल्लेखनीय है अमेरिका के प्रतिबंध को नजरअंदाज करके भारत ने ईरान के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को बरकरार रखा है।

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