अंग्रेज़ों से लड़ते-लड़ते शहीद हुए टीपू सुलतान: राष्ट्रपति कोविंद

देश के महान लोगों का नाम अगर लिया जाएगा तो टीपू सुलतान का नाम सबसे ऊपर की फ़ेहरिस्त में ही आएगा लेकिन कुछ लोग अपनी राजनीति चमकाने के लिए देश के वीर क्रांतिकारियों को भी नहीं छोड़ते. केन्द्रीय मंत्री अनंत हेगड़े ने हाल ही में एक बयान दिया था जिसमें उन्होंने टीपू को हिन्दू विरोधी और बर्बर बताया था. इस बात से टीपू के वंशज ख़ासे नाराज़ हैं और उनके ख़िलाफ़ अदालत जाने की बात कर रहे हैं.

इस बीच टीपू सुलतान के बारे में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कर्णाटक विधानसभा में बयान दिया है. उन्होंने महान नेता की सराहना करते हुए कहा कि टीपू अंग्रेज़ों से लड़ते हुए जंग के मैदान में शहीद हो गए. उन्होंने कहा कि मैसूर के इस टाइगर ने वारफेयर के लिए बनाए गए राकेट में भी विशेष योगदान दिया.

साल 2015 से कर्णाटक सरकार टीपू जयंती मनाती है. इसी प्रोग्राम को लेकर अनंत हेगड़े को भी बुलावा भेजा गया था जिसके बाद उन्होंने विवादित बयान दिया. इस बारे में टीपू के सातवीं पीढ़ी के वंशज साहबज़ादा मंसूर अली ने कहा कि वो इस बारे में कर्णाटक के गृह मंत्री रामालिंगा रेड्डी से बाद करेंगे और पुलिस में शिकायत दर्ज करायेंगे.

टीपू सुलतान की मौत 1799 में अंग्रेज़ों से सीधा मुक़ाबला करते हुए हुई. टीपू देश के सबसे पहले स्वतंत्रता सेनानी माने जाते हैं जिन्होंने उस दौर में अंग्रेज़ों का मुक़ाबला किया जब अधिकतर राजा और नवाब अंग्रेज़ों के साथ हो रहे थे. टीपू ने 1782 में मैसूर की गद्दी संभाली और 1799 तक राज किया. उनके कार्यकाल में मैसूर ने ख़ूब तरक्क़ी की लेकिन अंग्रेज़ों से उनकी जंग भी चलती रही. अंततः मराठा नेताओं और हैदराबाद के निज़ाम की मदद से अंग्रेज़ों ने जंग में फतह की.

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