…तो भाजपा को पटखनी देने के लिए ही वीरभद्र ने लिया ये अहम् फ़ैसला

November 5, 2017 by No Comments

शिमला: 83 साल के वीरभद्र सिंह हिमाचल प्रदेश की राजनीति के सबसे धुरंधर नेता हैं. उनमें अकेले ही पूरे राज्य के चुनाव को जीत लेने की क्षमता है. परन्तु चुनाव सिर्फ़ व्यक्तिगत पॉपुलैरिटी पर नहीं लड़े जाते इसलिए रणनीति, समीकरण सब बिठाने पड़ते हैं. इस बात को वीरभद्र से बेहतर कौन जानता होगा.

लगभग 55 साल से सक्रिय-राजनीति कर रहे वीरभद्र अपने अनुभव का पूरा फ़ायदा उठा रहे हैं. उन्होंने भाजपा को पटखनी देने के लिए एक ऐसी योजना बनायी है कि अभी तक विपक्षी पार्टी के क्षेत्रीय नेता उससे निबटने में नाकाम ही नज़र आ रहे हैं. असल में जबकि सब ये उम्मीद कर रहे थे कि ठियोग विधानसभा सीट से ही मुख्यमंत्री चुनाव लड़ेंगे, उन्होंने बहुत चालाकी से अर्की की सीट को अपने लिए पहले ही चुन लिया था.

असल में अर्की की सीट इसलिए महत्वपूर्ण है क्यूंकि ये सीट सोलन ज़िले के नज़दीक है और इस सीट की मदद से शिमला में तो कांग्रेस और मज़बूत होगी ही, साथ ही सोलन में भी मज़बूत हो जायेगी. अर्की सोलन ज़िले की पांच विधानसभा सीटों में से एक है और इससे उम्मीद की जा रही है कि ज़िले की बाक़ी सीटों पर भी कांग्रेस को फ़ायदा होगा.

ऐसा माना जाता है कि वीरभद्र को हिमाचल की जनता इस क़दर पसंद करती है कि वो किसी भी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ जाते उन्हें हराना आसान ना होता लेकिन अर्की विधानसभा सीट चुन कर उन्होंने भाजपा की योजना पर पानी फेर दिया.

क्षेत्रीय लोग वीरभद्र के कार्यकाल में हुए कामों से ख़ुश भी नज़र आते हैं. यहाँ पर वीरभद्र की सरकार ने सौ बेड का एक अस्पताल भी खोला है जिसमें सुविधाओं का विशेष ख़याल रखा गया है. वीरभद्र सरकार ने यहाँ स्कूल से लेकर सरकारी बस स्टैंड जैसे काम कराये हैं. आम लोग भी उनसे ख़ुश नज़र आते हैं. हालाँकि जैसा कि हम पहले ही कह चुके हैं कि वीरभद्र की नज़र अर्की पर ही नहीं है ज़िले की दूसरी सीटों पर भी है. 68 सीटों वाली विधानसभा में चार-पांच सीटों का इधर-उधर हो जाना ही जीत और हार को तय करेगा.

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