आज ही के दिन बाबा साहब ने अपने 3,85,000 समर्थकों के साथ अपनाया था बुद्धिज़्म

भारत के संविधान निर्माता कहे जाने वाले समाजसेवी महान नेता बाबा साहब भीम राव आंबेडकर ने आज ही के दिन 1956 में बुद्धिज़्म अपना लिया था.उनके साथ उनके 385000 समर्थकों ने भी बुद्धिज़्म अपनाया था.

भीम राव आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को इंदौर ज़िले के महू में हुआ था. भारत के पहले लॉ मिनिस्टर आंबेडकर ने लगातार दलित समाज, महिलाओं और मज़दूरों के लिए संघर्ष किया है. उन्हें देश में गणतंत्र स्थापना के निर्माता के तौर पर जाना जाता है.

आंबेडकर अपने छात्र-जीवन में बहुत अच्छे छात्र के बतौर जाने जाते थे. उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी और लन्दन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की. अपने शुरूआती करियर में उन्हें एक शानदार प्रोफेसर, वकील और अर्थशास्त्री के तौर पर जाना जाता था. उस दौर में भी उसके बाद भी उन्होंने लगातार परेशान हाल लोगों के लिए संघर्ष किया. दलित समाज के हक़ में आंबेडकर ने जो संघर्ष किया उसी का नतीजा है कि देश में आज दलित समाज को कुछ सम्मान प्राप्त हो सका है.उन्होंने छुआछूत के प्रति जीवन भर आन्दोलन किया. उन्होंने हिन्दू मंदिरों में दलित समाज के प्रवेश के लिए भी संघर्ष किया और जिस समाज को “Untouchable” कहा जाता था उस समाज को उन्होंने मुख्य-धारा में लाने की कोशिश की.

आंबेडकर को 1990 में देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया. इस दौर में देश की सबसे बड़ी दलित नेता मायावती ने डॉ भीम राव आंबेडकर की विचारधारा को आगे बढाने का काम किया. मायावती के गुरु कांशीराम ने भी डॉ आंबेडकर की विचारधारा को मज़बूती से आगे बढ़ाया था.

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