दूसरे धर्म को गाली देना ही बन गया है ‘आज का धर्म’

February 17, 2018 by No Comments

हम जब छोटे थे तभी से हमें हमारे माँ-बाप ये सिखाते रहे हैं कि किसी का बुरा नहीं करना चाहिए। बार-बार ये बात बतायी जाती है कि “मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना” लेकिन इसी मज़हब के नाम पर हमने अलग अलग ख़ेमे बना लिए हैं। अपने धर्म का ठीक से पालन करने की कोशिश के बजाय दूसरे धर्म को ग़लत साबित करने की हुड़दंगी है। बात ये भी नहीं है कि बहस तार्किक है, बहस तार्किक नहीं है.. बहस सिर्फ़ इसलिए है कि पॉइंट्स कैसे स्कोर किये जायें, किस तरह से दूसरे को ग़लत साबित किया जाए। सही बात तो ये है कि ये लोग अपने धर्म पर भी नहीं चलते हैं। ख़ुद को हिन्दू साबित करने के लिए मुसलमानों को गाली देना या मुसलमान साबित करने के लिए हिंदुओं को गाली देना इनकी फ़ितरत का हिस्सा बन गया है।

मुझे तो ये बात समझ ही नहीं आती कि इन लोगों को ये बेसिक सी समझ क्यूँ नहीं है कि धर्म के नाम पर किसी की ह्त्या नहीं की जा सकती. आज हालात ये हैं कि लोग बलात्कार जैसे घिनौने अपराध को भी हिन्दू और मुस्लिम के तराज़ू में तोलने लगे हैं. इस तरह के घिनौने अपराध जिन्हें समाज हमेशा बहुत बुरा मानता रहा है उनमें भी अब धार्मिक बहस शुरू हो गयी है. किसी के सही और ग़लत होने के लिए बात बस इतनी सी है कि वो हमारे धर्म का है या नहीं.

बहरहाल, समाज को जल्दी ही इस बात को समझना होगा कि सही और ग़लत की बुनियाद किसी इंसान के द्वारा किये गए कामों पर ही होगी और उससे जुड़ी परिस्थति को समझ कर लिए गए फैसलों पर.

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अरग़वान रब्बही
arghwanbharat@gmail.com

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