लाखों में कोई एक ही जानता होगा ट्रैन पे लिखे इन Numbers का मतलब?,जाने यहाँ

March 17, 2019 by No Comments

Transport की इस्तिलाह में रेल गाड़ी या ट्रेन एक ऐसी गाड़ी को कहा जाता है जो पटरी के ज़रीया मुसाफ़िरों या सामानों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए इस्तिमाल होती हो।ट्रेन अंग्रेज़ी का लफ़्ज़ है लेकिन हिन्दी में भी इस के लिए आम तौर पर ट्रेन का लफ़्ज़ ही इस्तिमाल किया जाता है और कभी कभी इस को रेल गाड़ी भी कहा जाता है।
अक्सर ट्रेनों में इंजन ट्रेन के अगले हिस्सा में लगा होता है और अपने पीछे लगी हुई ट्रेन को खींचता है।कुछ बहुत तेज़-रफ़्तार और नए ट्रेनों में अगे और पीछे दोनों तरफ़ इंजन लगे हुए होते हैं,उगला इंजन ट्रेन को खींचता है और जब कि पीछला इंजन ट्रेन को धकेलता है।कुछ माल ले जाने वाली ट्रेन जिन पर बहुत ज़्यादा वज़न लादा होता है दो से ज़्यादा इंजन भी लगे हुए होते हैं।
मल्टीपल यूनिट ट्रेन (Multiple Unit Train) में इंजन नहीं होता बल्कि हर डिब्बे में डीज़ल या बिजली की मोटरें लगी होती हैं जो ट्रेन को चलाती हैं। इन ट्रेनों के अगले हिस्सा में सिर्फ एक केबिन होता है जहां से ड्राईवर ट्रेन कंट्रोल करता है।सोलहवीं सदी के एक जर्मन साईंसदान जॉर्ज एगरीकोला ने अपनी किताब मादनियात में एक ऐसी गाड़ी का ज़िक्र किया है जो लकड़ी के खंबों पर चलती थी और उसे घोड़े खींचते थे।
1790 में इसी किस्म की एक घोड़ागाड़ी कानों से कोयला ढोने के लिए,इंग्लैंड में चलाई गई।लेकिन ये लोहे की पटरी पर चलती थी।1804 में एक अंग्रेज़ इंजीनियर रिचर्ड ट्रे दी थक ने भाप से चलने वाला इंजन तैयार किया।लेकिन ये सिर्फ़ बीस टन वज़न खींच सकता था।इस के बाद जॉर्ज स्टीफ़न सन ने इस से ज़्यादा ताक़तवर इंजन बनाया।
इस इंजन के कामयाब तजुर्बे के बाद अस्टा कुट्टन और डारलिंगटन तक रेल की पटरी बिछाई गई जिस पर सिर्फ माल गाड़ियां चलाई गईं।1830 में लीवरपूल से मानचैसटर को मिलाने वाली रेलवे लाईन का इफ़्तिताह हुआ और बर्तानिया में सबसे पहली मुसाफ़िर गाड़ी इसी रेलवे लाईन पर चली।आज हम ट्रेन के डिब्बों पर लगे हुये नंबर के बारे में भी आप को बताएँगे कि इसका मतलब किया होता है।
आप ने अक्सर देखा होगा कि ट्रेन के ऊपर नंबर लिखा होता है,दरअसल इस नंबर से साल का पता चलता है कि यह ट्रेन किस साल बनी है।जैसे कि अगर किसी ट्रेन पर 04052 नंबर लिखा है तो इसका मतलब यह है कि यह ट्रेन 2004 में बनी है।

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