नहीं सुनी जा रही ट्रम्प की बात, अमरीकी संसद ले सकती है ये फ़ैसला

October 18, 2018 by No Comments

वाशिंगटन डीसी: खाशोग्गी मामले में अब सऊदी अरब पर अमरीकी दबाव बढ़ता जा रहा है. अमरीकी हाउस ऑफ़ रिप्रेजेन्टेटिव में सऊदी अरब के ख़िलाफ़ प्रस्ताव लाया गया है. इस प्रस्ताव के मुताबिक़ अमरीका को सभी तरह की मदद और हथियारों की बिक्री सऊदी अरब से रोकनी होगी. हाउस ऑफ़ रिप्रेजेन्टेटिव अमरीकी कांग्रेस का निचला सदन है जैसे भारतीय संसद में लोकसभा.

मस्सचुसेट्स डेमोक्रेटिक सांसद जिम मैक-गवर्न इस बारे में प्रस्ताव लाए हैं. उन्होंने खाशोग्गी मामले पर टिपण्णी की और कहा कि ये अन्तराष्ट्रीय क़ानून का खुला उल्लंघन है. प्रस्ताव में कहा गया है कि अमरीकी सेना सभी तरह की मदद और बिक्री सऊदी अरब के लिए रोक देगी. मैक-गवर्न ने इसके पहले ये कहा था कि अगर अमरीका किसी चीज़ के लिए खड़ा होता है तो वो है ह्यूमन राइट्स.. हमारी वैल्यूज ही हमारी शक्ति हैं और हम इन वैल्यूज पर हमला होने नहीं दे सकते.

आपको बता दें कि इस बिल के पास होने से कुछ ही देर पहले अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि वो सऊदी अरब से दूर नहीं जा सकते.

आपको बता दें कि २ अक्टूबर को दा वाशिंगटन पोस्ट के वरिष्ट पत्रकार जमाल खाशोग्गी अपने निजी काम से तुर्की के इस्तांबुल स्थित सऊदी कांसुलेट गए थे. वो तभी से गुमशुदा हैं. उनके सऊदी कांसुलेट में घुसने की फुटेज तो है लेकिन बाहर आने की नहीं है. इस वजह से सऊदी अरब पर आरोप लग रहा है कि खाशोग्गी की हत्-या करवा दी गयी है.

आपको बता दें कि संयुक्त राज्य अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि अगर सऊदी अरब का हाथ जमाल खाशोग्गी के गुम होने में पाया जाता है तो इसकी क़ीमत सऊदी अरब को चुकानी होगी. सऊदी अरब ने इन धमकियों को ज़्यादा तवज्जो नहीं देते हुए कहा कि कोई भी प्रतिबन्ध सऊदी अरब पर लगाया गया तो उससे बड़ा रिएक्शन देखने को मिलेगा. सऊदी अरब ने कहा कि वो ग्लोबल इकॉनमी का महत्वपूर्ण प्लेयर है.

आपको बता दें कि जमाल खाशोग्गी वाशिंगटन पोस्ट के लिए भी काम करते हैं और उनका लेखन सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान की आलोचना करने वाला रहा है. खाशोग्गी सऊदी अरब के नागरिक हैं, उनका निवास संयुक्त राज्य अमरीका में है. इस मामले पर तुर्की ने भी सऊदी अरब से ख़ासी नाराज़गी जताई है. लम्बी बातचीत के बाद तुर्की के अधिकारियों को सऊदी कांसुलेट में घुसने की अनुमति मिली और जाँच आगे बढ़ी.इस मामले की वजह से सऊदी अरब के कई देशों से सम्बन्ध बिगड़ रहे हैं.

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