शांतिप्रिय देश की मदद के लिए साथ आया तुर्की

October 12, 2018 by No Comments

पिछले कुछ सालों में तुर्की एक ऐसा देश बन कर उभरा है जिसने अपनी अर्थव्यवस्था तो ठीक की ही है, आस पास के क्षेत्र का भी भरपूर सहयोग किया है. तुर्की एक ऐसा देश बन कर उभरा है जो अपने क्षेत्र और दूर भी देशों की मदद करने में आगे रहा है. एक बार फिर रजब तैयब एरदोगन के नेतृत्व में तुर्की ने अपनी जिममेदारी बहुत अच्छी तरह से निभाई है. इसी फ़ेहरिस्त में तुर्की ने एक और क़दम बढ़ाया है और कुवैत की मदद करने की घोषणा की है.

हालाँकि ये कुवैत और तुर्की के बीच सैन्य आदान-प्रदान की बात है लेकिन कुवैत बहुत छोटा देश है, ऐसे में तुर्की को उससे बहुत फ़ायदा नहीं ही मिल पाएगा लेकिन तुर्की कुवैत की काफ़ी मदद कर सकता है. इस बारे में एक समझौता हुआ है जिसके बारे में कुवैती सेना ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि ये समझौता भाईचारा बढ़ाने, अनुभव साझा करने और प्रयासों में एकरूपता लाने के लिए है. 9 और 10 अक्टूबर को कुवैती सिटी में इस बारे में लम्बी मीटिंग चली.पिछले कुछ सालों में दोनों देशों के बीच सम्बन्ध मज़बूत हुए हैं. ये सम्बन्ध कई दायरों में बढ़े हैं फिर चाहे वो आर्थिक हो, ट्रेड हो, रक्षा हो या फिर राजनीतिक हो.

पिछले साल तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एरदोगन ने कुवैत का दौरा किया. इस दौरे में उन्होंने सम्बन्ध मज़बूत करने पर ज़ोर दिया. तुर्की ने पिछले कुछ सालों में कुवैत की हर मोर्चे पर मदद की है, कुवैत ने भी इसको लेकर सकारात्मक रवैया ही रक्खा है. आपको बता दें कि पिछले कुछ समय से चले आ रहे क़तर-सऊदी अरब मतभेदों में दोनों ही देशों ने तटस्थ की भूमिका निभाई है. कुवैत उन चंद देशों में से रहा है जिसने क़तर और सऊदी अरब का समझौता कराने की कोशिश की है. कुवैत दुनिया के सबसे छोटे देशों में से एक माना जाता है लेकिन कुवैत दुनिया के सबसे अमीर देशों में से भी एक है. कुवैत की मुद्रा दुनिया की सबसे महँगी मुद्रा है.

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *