UNGA: रोहिंग्या मुद्दे को हल करने के लिए बंगलादेशी PM ने दिए पांच सुझाव

September 22, 2017 by No Comments

न्यूयॉर्क: बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने संयुक्त राष्ट्र की 72वीं आम सभा में बोलते हुए कहा की रोहिंग्या लोगों पर हो रही हिंसा को तुरंत रोका जाना चाहिए. शेख़ हसीना ने बताया कि बंगलादेश में 8 लाख से अधिक रोहिंग्या रिफ्यूजी हैं. उन्होंने कहा की रोहिंग्या लोगों के वापिस म्यांमार ना आने देने के लिए म्यांमार ने अपने बॉर्डर एरिया में लैंडमाइंस लगायी हैं.

इस मुद्दे को हल करने के लिए हसीना ने पांच सुझाव दिए हैं-
1. म्यांमार को तुरंत ही हिंसा को रोक देना चाहिए और नरसंहार की परम्परा को रोक देना चाहिए.
2. सेक्रेटरी जनरल को म्यांमार में एक फैक्ट फाइंडिंग मिशन भेजना चाहिए.
3. म्यांमार के अन्दर संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में “सेफ़ ज़ोन”बनाए जाने चाहियें.
4. रोहिंग्या रिफ्यूजी के वापस म्यांमार में जाने की व्यवस्था की जाए.
5. कोफ़ी अन्नान कमीशन की सिफ़ारिशों को तुरंत बिना किसी शर्त के लागू किया जाए.

रोहिंग्या मुद्दे के इलावा उन्होंने फ़िलिस्तीनी कॉज़ का समर्थन किया है.इसके अतिरिक्त उन्होंने हर क़िस्म के आतंकवाद की निंदा की. बांग्लादेश लिबरेशन वॉर को याद करते हुए उन्होंने कहा की बांग्लादेश ने अपने शुरूआती दिनों में भयंकर नरसंहार देखा है.

म्यांमार सेना और सरकार पर आरोप है कि वो रखीने प्रांत में रोहिंग्या लोगों के ख़िलाफ़ नरसंहार कर रही है. संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में कई देशों ने रोहिंग्या मुद्दे पर म्यांमार की कड़ी निंदा की है. फ़्रांसिसी राष्ट्रपति इम्मानुएल मक्रों ने भी इसे “एथनिक क्लीनसिंग” बताया. ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमरीका, और तुर्की जैसे देशों ने भी म्यांमारी सरकार की निंदा की है.

भारत का पक्ष
दिल्ली में भारतीय केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने रोहिंग्या मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि जो अवैध रूप से भारत में घुस आये हैं वो रिफ्यूजी नहीं हैं. रिफ्यूजी होने के लिए कुछ तरीक़े होते हैं उन्हें फॉलो नहीं किया गया है. उन्होंने बताया कि भारत 1951 के UN रिफ्यूजी कन्वेंशन का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है इसलिए ये ज़रूरी नहीं कि वो रिफ्यूजी को भारत में रखे. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है.

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