मानवेन्द्र सिंह और वसुंधरा राजे के बीच है काँटे की टक्कर, ये बन रहे हैं समीकरण

राजस्थान: कांग्रेस पार्टी ने राजस्थान की झालरापाटन विधानसभा सीट पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ पूर्व भाजपाई मानवेंद्र सिंह को चुनाव मैदान में उतारकर मुकाबले को टक्कर का बना दिया है। मानवेंद्र सिंह पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा के कद्दावर नेता रहे जसवंत सिंह के पुत्र हैं। उन्होंने पिछले माह ही कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की थी। हालांकि वसुंधरा राजे 2003 से झालरापाटन सीट जीतती रही हैं, लेकिन इस बार कांग्रेस पार्टी ने मानवेंद्र सिंह को यहां से टिकट देकर चुनावी समीकरण बदलने का प्रयास किया है। 

मानवेंद्र सिंह हाल ही में बीजेपी को छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। यह सीट झालावाड़ जिले में आती है। शनिवार को ही इस सीट से वसुंधरा ने अपना नामांकन दाखिल किया है। राजस्थान में अपनी सत्ता बचाने के लिए मुख्यमंत्री राजे हर जतन कर रही हैं। ऐसे में मानवेंद्र सिंह यहां से उन्हें कड़ी टक्कर दे सकते हैं। झालरापाटन में नामांकन दाखिल करने के बाद मुख्यमंत्री राजे ने कहा कि कांग्रेस को उनके सामने कोई स्थानीय चेहरा नहीं मिल रहा था इसलिए वह बाहरी (मानवेंद्र) को ले आयी. उन्होंने समर्थकों से कहा,‘‘झालावाड़ (जिले) में किसी परिवार की लड़ाई नहीं है बल्कि पूरे राजस्थान की लड़ाई है.’ उनकी सरकार द्वारा करवाए गए विकास कार्यों की ओर संकेत करते हुए उन्होंने कहा,‘‘अभी तो ट्रेलर देखा है पूरी फिल्म बाकी है.” दूसरी तरफ, मानवेंद्र ने कहा कि वह वसुंधरा के खिलाफ चुनौती स्वीकार करते हैं. मानवेंद्र ने दिल्ली में ‘भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘‘राहुल गांधी और केंद्रीय चुनाव समिति ने मुझ पर विश्वास जताया है. मैं उनका आभारी हूं. यह एक चुनौती है जिसे स्वीकार करता हूं.”

कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे अमीन खान ने कुछ समय पहले अपने एक बयान में कहा था कि हमारे इलाक़े में राजपूतों और मुसलमानों में अच्छे रिश्ते रहे हैं।इससे कांग्रेस को लाभ होगा। उनके मुताबिक, मरुस्थल के इस भूभाग में अक्सर पूर्व जागीरदार और राजपूत भाजपा की बड़ी ताकत रहे हैं।अब मानवेन्द्र के कांग्रेस में जाने से भाजपा कमजोर हो सकती है। मुस्लिम और राजपूत, कांग्रेस के पक्ष में खड़े होंगे, इसके पूरे आसार हैं। मानवेंद्र सिंह ने जब कांग्रेस का दामन थामा तो उससे कुछ दिन पहले खासतौर से राजपूत समुदाय में यह मैसेज भी चलाया गया कि वाजपेयी सरकार के दौरान जब विमान अपहरण के बाद किसी मंत्री को कंधार भेजने का मौका आया तो जसवंत सिंह को रवाना कर दिया गया। उस वक्त जसवंत सिंह ने पार्टी के लिए सारी तोहमत अपने नाम पर ले ली थी, मगर उसी भाजपा ने 2014 में उनकी टिकट काट दी।

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