जन्मदिन विशेष- वर्जिनिया वूल्फ़:,'”एक औरत होने के नाते मेरा कोई देश नहीं है, एक औरत होने के नाते मेरा देश पूरी दुनिया है.”

January 25, 2018 by No Comments

स्पेशल: ब्रिटेन की मशहूर नॉवेलिस्ट वर्जिनिया वूल्फ़ का आज 136वाँ जन्मदिन है और इस मौक़े पर गूगल ने भी उनके सम्मान में डूडल भी लगाया है. 25 जनवरी, 1882 में जन्मी वूल्फ़ को उनके मशहूर नोवेल्स Mrs Dalloway (1925), टू दा लाइटहाउस (1927), ऑर्लैंडो (1928) और A Room of One’s Own (1929) के लिए जाना जाता है.

उनका पहला नावेल सन 1915 में आया जब उनका नावेल ‘दा वॉयेज आउट’ मंज़र ए आम पर आया. उनकी लिखावट में रूढ़िवादिता नहीं थी बल्कि उन्होंने आधुनिकता को बहुत बोल्ड तरह से पेश किया है.उन्होंने अंग्रेज़ी लेखन में एक नए क़िस्म की शुरुआत की. वूल्फ़ के कई कथन भी काफ़ी मशहूर हैं. उन्होंने एक समय कहा था कि “एक औरत के पास पैसे होना ज़रूरी हैं और अगर उसे फिक्शन लिखना है तो एक कमरा भी उसका अपना होना चाहिए”. उनके कुछ कथन हम नीचे दे रहे हैं.
“एक औरत होने के नाते मेरा कोई देश नहीं है, एक औरत होने के नाते मेरा देश पूरी दुनिया है.”
“आप ज़िन्दगी को टाल कर शान्ति नहीं पा सकते”
“अगर देखना चाहते हो तो अपनी लाइब्रेरीज़ को देखो, लेकिन गेट नहीं है, ताला नहीं है, बोल्ट नहीं है जो आपके माइंड की आज़ादी को रोक ले”

वूल्फ़ के चाहने वाले दुनिया भर में हैं. उन्हें अपने दौर के सबसे दानिश्वर लोगों में शुमार किया जाता है. वो ब्लूम्स्बुरी ग्रुप की थीं जिसमें अर्थशास्त्री जॉन मेनार्ड कीन्स, नॉवेलिस्ट ईएम् फोरस्टर, आलोचक रॉजर फ्राई और पेंटर वनेस्सा बेल भी थे. वूल्फ़ डिप्रेशन की शिकार थीं और इस वजह से उन्होंने 1941 में ख़ुदकुशी कर ली.

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