वरिष्ट पत्रकार ने पूछा अहम् सवाल- क्या न्याय की पहली शर्त पीड़ित का धर्म-परिवर्तन है?

October 5, 2018 by No Comments

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत के गांव बदरखा में कुछ महीने पहले अख्तर अली के पिरवार के एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में ला-श मिली थी। परिजनों ने हत्-या की आशंका जताई और ला-श को दफ्ना दिया फिर पुलिस के पास गये, इसके बाद पुलिस ने ला-श को क़ब्र से निकालकर उसका पोस्टमार्टम कराया। अख्तर ने पुलिस प्रशासन की तरफ से न होने वाली कार्रावाई से नारज़गी जताई और अपने परिवार के सदस्यों के साथ हिन्दू धर्म अपना लिया.

अख्तर का आरोप है कि उसकी ‘कौम’ ने उसका साथ नहीं दिया इसलिये उसने अपने परिवार सहित इस्लाम धर्म अपना लिया। सवाल यह पैदा होता है कि अख्तर की कौम अख्तर का क्या साथ देती ? क्या वह कौम जाकर थाने पर चढ़ाई करती और थाने को आग लगाती ? दूसरी तरफ गांव में सक्रिय युवा हिन्दू वाहिनी के लोगों ने अख्तर को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया और उसके परिवार का धर्म परिवर्तन करा दिया। क्या न्याय दिलाने की पहली शर्त यह है कि पीड़ित को धर्म बदलकर हिन्दू होना पड़ेगा ? अगर पीड़ित हिन्दू धर्म नहीं अपनाना चाहता तो क्या उसे न्याय से वंचित कर दिया जायेगा ?

इस परिवार के पास अपना मकान नहीं था गांव के हिन्दू समाज के एक युवक ने हिन्दू धर्म अपनाने के एवज में इन्हें रहने के लिये अपना ख़ाली पड़ा मकान दे दिया। क्या यह मकान अख्तर को ‘अख्तर’ रहते नहीं मिल सकता था ? जो उसे तभी दिया गया जब वह ‘धरम सिंह’ हो गया। साबित यह हुआ कि जो लोग इस आधार पर इंसाफ दिलाने का भरोसा दिलाएँ कि आप अपना धर्म त्याग दो वे कुछ भी हो सकते हैं मगर धार्मिक तो नहीं हो सकते। एक पुलिस अधिकारी ने इन लोगों का धर्म परिवर्तन कराने वालों से कहा कि जो ना खाए सुरा (सूअर) हिन्दू ना होवै पूरा. उनका कहना था कि हिन्दू तो हो गया है, लेकिन उसे सूअर खिलाकर दिखा दो. सवाल यह है कि क्या हिन्दू समाज में सभी के साथ इंसाफ हो गया ? क्या इस समाज में कोई पीड़ित नही है ?

क्या इस समाज में किसी के साथ नाइंसाफी नहीं हुई है ? तो हिन्दू समाज में पीड़ित हैं उन लोगो को इंसाफ दिलाने के लिये युवा हिन्दू वाहिनी जैसा संगठन क्या करेगा ? उनका तो धर्म परिवर्तन भी नहीं करा सकते क्योंकि वह तो पहले ही उस समाज का हिस्सा है जो समाज हिन्दू धर्म स्वीकार करने के आधार पर न्याय का भरोसा दिलाता है, घर दिलाता है, यहां तक कि जातियां तक वितरित करता है। अगर युवा हिन्दू वाहिनी के पास कोई योजना है तो कृप्या करके उससे अवगत करायें।

(ये आलेख वसीम अकरम त्यागी की फ़ेसबुक वाल से लिया गया है, इसमें प्रदर्शित विचार उनके अपने हैं)

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