कानून व्यवस्था की धज्जियाँ उड़ चुकी है, लोकतंत्र ख़तरे में है, सब मिल कर बचाएँ..

January 17, 2018 by No Comments

हमारे देश में रह-रहे हर व्यक्ति का अपना कर्तव्य है। उसे अपने कर्तव्यो का पालन करना चाहिए। एक नेता 5 सालों के लिए सत्ता में आता है और एक अधिकारी अपने पद पर 60 वर्ष की उम्र तक कार्य करता है। जोकि अच्छा पढ़ा लिखा और अच्छी शिक्षा पा कर हर विभागों में होते है। जिनके हाथों में कानून पालन करना और उसकी सुरक्षा पूरा अधिकार होता है। फिर भी आज हमारा लोकतंत्र खतरे में है।

एक पढ़ा लिखा व्यक्ति रोजगार की तलाश में इधर-उधर भटक रहा है।
गरीब व्यक्ति को न्याय केवल इसलिए नहीं मिला पाता क्यूँकि वह गरीब है।
आये दिन देश में बलात्कार, हत्या, चोरी जेसे अपराध बढ़ते जा रहे हैं।
अपने ही देश के लोग एक दुसरे को पसंद नहीं करते।
छोटे वर्ग के लोगो को और दबाया जा रहा है।
कानून व्यवस्था की धज्जियाँ उड़ चुकी है।
कहाँ है लोकतंत्र ??

चंद पैसों की लालच में लोग अपना इमान,धर्म सब बेचने पर आ गए हैं। जो लोग काम करना भी चाहते है, वह भी दबे हुए हैं। उनके अधिकारियों द्वारा उन्हें दबाया जा रहा है। अगर हम चाहें तो देश के लोकतंत्र की हालत सुधर सकती है। लेकिन उसके लिए देश के हर व्यक्ति अपने कर्तव्यो को समझ कर अपनी जिम्मेदारियों को समझे और उनका पूरा करने में लगे तो कोई हमारे लोकतंत्र का कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। हमें ये समझ लेना चाहिए की हमे अपने लोकतंत्र की सुरक्षा खुद ही करनी होगी।

सौरभ सिंह
( लेखक लखनऊ के रहने वाले हैं)

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