हम मोदीजी की तरह नहीं कि हेलीकाप्टर में बैठ के घूमकर चले जाएँ: जिग्नेश मेवाणी

December 2, 2017 by No Comments

राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच के नेता जिग्नेश मेवाणी वडगाम से चुनावी मैदान में हैं. हालाँकि ये माना जा रहा है कि वो वडगाम के अलावा गुजरात की दूसरी विधानसभा सीटों पर भी अपना प्रभाव छोड़ेंगे. कांग्रेस के समर्थन से उनकी जीत की संभावनाएं बढ़ गयी हैं. इस बीच भाजपा ने उनके बारे में कहा है कि वो वडगाम वासियों का भला नहीं कर सकते क्यूंकि वो यहाँ के नहीं हैं. इस पर जिग्नेश ने टिपण्णी करते हुए कहा है कि भाजपा बुरी तरह से बौखला गयी है और इस वजह से इस तरह का प्रचार चला रही है. उन्होंने भाजपा द्वारा चलाये गए प्रचार पर कहा कि दोस्तों भाजपा मेरे ख़िलाफ़ प्रचार कर रही है कि मैं स्थानीय उमीदवार नहीं हूँ और इसलिए वाडगम की जनता का काम नहीं करूँग.

उन्होंने कहा कि भाजपा हार के डर से बुरी तरह बौखला गयी है. जिग्नेश ने कहा,” दोस्तों जब बनासकांठा में पुर आया था तब में और हमारे RDAM के साथियों ने बनासकांठा के पुर पीड़ितों के दुख के समय में साथ रहकर पूरी तरह से जो भी हो सके वो मदद किया था, मोदीजी की तरह नही हेलीकॉप्टर में बेठ के घूमकर चल गए।दोस्तों काम करने की चाह चाहिए वरना लोग तो मन की बात करके भी काम नही करते” जिस तरह से जिग्नेश भाजपा के ख़िलाफ़ प्रचार कर रहे हैं उससे तो ऐसा लगता है कि भाजपा के पास से दलित वोट खिसकने वाला है. भाजपा के नेता भी दबी ज़बान में इस बात को मान रहे हैं कि ये चुनाव भाजपा के लिए पिछले कई चुनावों की तुलना में बहुत मुश्किल चुनाव है.

हार्दिक पटेल और अल्पेश ठाकोर भी बने हैं परेशानी
जिग्नेश मेवाणी के अलावा हार्दिक पटेल पटेल और अल्पेश ठाकोर भी भाजपा के लिए परेशानी बने हुए हैं. अल्पेश ने जहां कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर ली है वहीँ हार्दिक पटेल ने बिना कांग्रेस में शामिल हुए ही भाजपा का विरोध क़ायम किया हुआ है. सबसे ज़्यादा चर्चा देखा जाए तो हार्दिक पटेल की ही हो रही है. हार्दिक की रैलियों में जिस तरह से भीड़ जुट रही है उससे ऐसा लग रहा है कि पाटीदार वोटों का बड़ा हिस्सा भाजपा से दूर जा रहा है. पिछले चुनाव में पाटीदारों ने बड़ी संख्या में भाजपा को वोट दिया था लेकिन पाटीदार अनामत आन्दोलन समिति ने जिस तरह से आरक्षण को लेकर आन्दोलन चलाया और उस पर भाजपा सरकार की कार्यवाही की वजह से स्थिति इस बार अलग है.

अल्पेश ठाकोर के बारे में भाजपा हालाँकि कहती है कि वो पुराने कांग्रेसी हैं लेकिन ये भी सच है कि भाजपा ने उन्हें अपने पाले में लाने की कोशिशें की थीं. अब जबकि वो कांग्रेस में चले गए हैं तो कांग्रेस ये उम्मीद कर रही है कि इससे OBC वोट का बड़ा हिस्सा उसके पक्ष में आएगा. गुजरात में इस माह दो चरणों में चुनाव होने हैं और ऐसे में भाजपा और कांग्रेस तो मैदान में हैं ही, साथ ही इन तीन युवाओं की भी साख दांव पर लगी हुई है. अब ये देखने वाली बात होगी कि जीत किसके हिस्से आती है.

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