ओवैसी या मदनी…कौन सही है और कौन गलत ?

November 10, 2018 by No Comments

भारत के प्रतिष्ठित मुस्लिम धर्मगुरु महमूद मदनी द्वारा आल इंडिया इतेहदुल मुस्लीमीन के नेता असदुद्दीन ओवैसी पर की गयी टिप्पड़ी से सोशल मीडिया पर उबाल आ गया है.ये कोई पहला मौका नही है इससे पहले भी मौलाना मदनी ने 2016 में असदुद्दीन ओवैसी पर निशाना साधा था लेकिन तब ये खबर इतनी नही उछली.इस समय भारतीय मुस्लिम के जनमानस में ये नाच रहा है इन दो मुस्लिम नेताओ में कौन सही है और कौन गलत है?इस आर्टिकल में हम ये जानने की कोशिश करेंगे लेकिन उससे पहले दोनों रहनुमाओ में कुछ समानता भी है उसे जानते है.
मौलाना मदनी और ओवैसी में है ये समानता…
आल इंडिया इतेहदुल मुस्लिमीन के नेता असदुद्दीन ओवैसी जो आज एक नई कयादत बनाने की कोशिश कर रहे है वो अपने जीवन का एक हिस्सा मौलाना मदनी जैसी ही सिआसत करने में बिता चुके है.आप को बता दे मौलाना मदनी एक जाने माने इस्लामिक धर्मगुरु के अलावा राज्यसभा सांसद भी रहे है.उनकी छवि और राजनैतिक विचार कांग्रेस समर्थन वाले रहे है लेकिन मोदी युग शुरू होने के बाद वो अब बैलेंस बना के चल रहे है.
अगर बात असदुद्दीन ओवैसी की जाए तो वो भी बीस साल से अधिक वर्षो तक कांग्रेस के साथ सहयोगी की भूमिका में रहे है.अधिक वक़्त नही है 2009 में लोकसभा में विश्वास मत के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह की जमकर तारीफ की.उनका विस्वास मत के बाद का भाषण देखिये.हलाकि 2013 के बाद से ओवैसी खुद को एक ताकत के रूप में खड़ा करने की कोशिश कर रहे है जिसमे वो अभी तक कुछ ख़ास सफल नही रहे है लेकिन AIMIM के कैडर को लगता है कि सफलता आने वाले वर्षो में मिलेगी.
मदनी ने जो कहा वो कहा लेकिन ये तो
ने मौलाना मदनी ने कहा कि मुसलमान बाहैसियत मुस्लिम के अपना कोई पोलिटिकल लीडर बनाये में इसका विरोधी हूँ,और मैं इसको मुसलमानों की मुखालिफत समझता हूँ,मैं असदउद्दीन ओवैसी को बहुत अच्छा आदमी मानता हूँ,लेकिन मैं उनसे डिसअग्री करता हूँ कि वो इंडियन मुस्लिम के पोलिटिकल लीडर बनने की कोशिश करें.
मौलाना मदनी ने कहा कि अगर असदउद्दीन ओवैसी इंडियन मुस्लिम के पॉलिटिकल लीडर बनने की कोशिश करते हैं तो हम उन्हें कामयाब नही होने दूँगा,आप हैदराबाद के पॉलिटिकल लीडर बन जाईये,मुझे ये भी मंज़ूर है आप आंध्रा प्रदेश और तिलंगाना के पोलिटिकल लीडर बन जाइये अच्छा है इससे आगे नही जाना चाहिए.
मुस्लिम वोटो के बटवारे का है भय
मौलाना मदनी भारत में मुस्लिम वोटो के बटवारे के भय से परेशान दिख रहे है.ऐसा माना जाता है ओवैसी की पार्टी जितना विस्तार करेगी भाजपा विरोधी सेकुलर पार्टी के वोटो में उतना बटवारा होगा.ऐसी सोच कई मुस्लिम दर्शा चुके है.
ओवैसी की सिआसत का फैसला अवाम के हाथ में
मौलाना मदनी चाहे जितनी बाते करे लेकिन मुस्लिम जनमानस ना किसी सियासी लीडर और ना ही कोई मज़हबी लीडर के फैसले को मान रहा है.अगर मुस्लिम ने ओवैसी को अपना लीडर मान लिया तो मदनी कुछ नही कर पाएंगे और ओवैसी को मुस्लिम ने नकार दिया फिर मदनी का इसमें तिनके जैसा रोल रहेगा लेकिन ओवैसी और मदनी अपनी सोच और अपनी रणनीति बनाने के लिए आज़ाद,दोनों में से कोई किसी को ना तो रोक सकता है और न ही फायदा पंहुचा सकता है.

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